EVM विरोध पर मायावती कायम,VVPAT से पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं

EVM को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। कुछ दलों ने समय-समय पर इसकी विश्वसनीयता और VVPAT सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव प्रक्रिया में EVM के इस्तेमाल की मौजूदा व्यवस्था लागू है। ऐसे में मायावती की टिप्पणी....

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 28, 2026 12:20 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से मतदान कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही EVM के जरिए चुनाव कराने का विरोध करती रही है और इस व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी है। मायावती के मुताबिक, EVM के साथ VVPAT व्यवस्था लागू होने के बावजूद उनकी आपत्तियां दूर नहीं हुई हैं।

मायावती ने कहा कि मतदान प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, EVM से जुड़े विवाद का समाधान केवल VVPAT मशीन जोड़ने से नहीं हुआ, क्योंकि प्रत्येक VVPAT पर्ची की गिनती नहीं की जाती। उन्होंने इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर बदलाव की जरूरत बताई। मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और EVM-VVPAT व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस समय-समय पर सामने आती रही है।

EVM और VVPAT को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं। अप्रैल 2024 के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने EVM की विश्वसनीयता और VVPAT से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार किया था। अदालत के समक्ष 100 प्रतिशत VVPAT पर्चियों की गिनती और बैलेट पेपर व्यवस्था पर लौटने जैसी मांगें भी रखी गई थीं। हालांकि, अदालत ने EVM आधारित मतदान व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश नहीं दिया।

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले में मतदाता के इस अधिकार पर भी चर्चा हुई थी कि उसका डाला गया वोट सही तरीके से दर्ज और गिना गया है या नहीं। अदालत के सामने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और VVPAT सत्यापन से संबंधित कई तर्क रखे गए थे। इस लिहाज से मायावती का ताजा बयान उस व्यापक बहस को फिर सामने लाता है, जिसमें चुनाव प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल के साथ सत्यापन और पारदर्शिता की मांग की जाती रही है।

मायावती ने अपने बयान में कहा कि BSP ने EVM से मतदान की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना है कि पार्टी की आपत्ति केवल मशीन के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वोटों के सत्यापन और उनकी गिनती की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, जब VVPAT पर्चियों का सीमित स्तर पर मिलान किया जाता है, तो मतदाताओं के मन में उठने वाले सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं होते।

EVM को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं। कुछ दलों ने समय-समय पर इसकी विश्वसनीयता और VVPAT सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव प्रक्रिया में EVM के इस्तेमाल की मौजूदा व्यवस्था लागू है। ऐसे में मायावती की टिप्पणी चुनावी पारदर्शिता को लेकर BSP के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराती है।

आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया और तकनीक से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने रह सकते हैं। खासतौर पर EVM, VVPAT, वोटों की गिनती और सत्यापन जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों की मांगें तथा चुनाव आयोग की व्यवस्था के बीच बहस जारी है। मायावती ने अपने बयान के जरिए एक बार फिर इस मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश की है।

 

Advertisement