मुंबई: बॉलीवुड से जुड़े कुछ नामों और प्रोडक्शन कंपनियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई से फिल्म इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई इनकम टैक्स विभाग की कई टीमें अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह, फिल्म निर्माता वाशु भगनानी और पैनोरमा स्टूडियोज से जुड़े करीब 12 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन कर रही हैं। अधिकारियों की जांच का फोकस कथित वित्तीय अनियमितताओं और फिल्मों से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए विदेश में किए गए लेन-देन पर बताया जा रहा है। हालांकि, जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति या कंपनी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आयकर विभाग की टीमें संबंधित परिसरों में दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और विदेश भेजी गई रकम से जुड़े कागजात की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों की ओर से यह देखा जा रहा है कि फिल्म प्रोजेक्ट्स के नाम पर हुए कथित विदेशी भुगतान नियमों के अनुरूप थे या नहीं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तलाशी के दौरान विभाग को क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली है और जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या होगा।
इस कार्रवाई के बीच रकुल प्रीत सिंह के भाई अमन प्रीत सिंह से जुड़ा दिसंबर 2025 का ड्रग्स मामला भी चर्चा में आ गया है। हालांकि, दोनों मामलों को अलग-अलग जांच के तौर पर देखना जरूरी है। दिसंबर 2025 में हैदराबाद पुलिस और एलीट एक्शन ग्रुप फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट यानी EAGLE फोर्स ने ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की थी। 19 दिसंबर को हुई एक कार्रवाई में दो कारोबारियों को कथित तौर पर ड्रग्स की बिक्री के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से 43 ग्राम कोकीन और 11.5 ग्राम MDMA बरामद होने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कुछ लोगों के नाम सामने आए थे, जिनमें अमन प्रीत सिंह का नाम भी शामिल था। पुलिस ने उन्हें कथित तौर पर ड्रग्स का नियमित उपभोक्ता बताया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया था कि अमन पर उन दोनों कथित ड्रग पेडलर्स से पांच बार ड्रग्स खरीदने का शक था। साथ ही पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया था कि उस समय उन्हें आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया था।
अब मुंबई में आयकर विभाग की मौजूदा कार्रवाई के दौरान रकुल प्रीत सिंह और उनसे जुड़े लोगों का नाम सामने आने से मामला और चर्चा में है। फिलहाल आयकर विभाग की तलाशी जारी है और जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि कथित विदेशी लेन-देन में कोई कर या वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, सामने आई जानकारी को आरोप या जांच के दायरे में मौजूद दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।