यूपी MLC चुनाव: भाजपा ने खोले पत्ते, जानिए किसे मिला टिकट

यूपी एमएलसी चुनाव 2026 के लिए भाजपा ने छह प्रत्याशी घोषित किए। जानिए शिक्षक और स्नातक सीटों पर किसे मिला टिकट और क्या हैं चुनावी समीकरण।

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  • September 29, 2026 4:01 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ, : उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने भी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की छह सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। मंगलवार को सामने आई सूची में भाजपा ने वाराणसी, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी, आगरा और गोरखपुर-फैजाबाद निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार उतारे हैं। इसके साथ ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच चुनावी मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट होने लगी है।

भाजपा की ओर से जारी सूची में वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर के नाम शामिल हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वाराणसी से प्रमोद मिश्रा, आगरा से इंजीनियर हरि किशोर त्रिपाठी और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया गया है।

इन सीटों पर होने वाले चुनाव में सामान्य मतदाताओं के बजाय संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। यही कारण है कि इन चुनावों में शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, शिक्षक संगठनों और स्नातक मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

भाजपा ने तीन स्नातक और तीन शिक्षक सीटों पर उतारे उम्मीदवार

भाजपा की नई सूची में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी ने तीन स्नातक और तीन शिक्षक सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं। इनमें कुछ मौजूदा विधान परिषद सदस्य भी शामिल हैं।

भाजपा के घोषित प्रत्याशियों की सूची इस प्रकार है:

– वाराणसी स्नातक: केदार नाथ सिंह

– मेरठ स्नातक: दिनेश गोयल

– इलाहाबाद-झांसी स्नातक: अशोक कुमार राठौर

– वाराणसी शिक्षक: प्रमोद मिश्रा

– आगरा शिक्षक: इंजीनियर हरि किशोर त्रिपाठी

– गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक: ध्रुव त्रिपाठी

वाराणसी और मेरठ की सीटों पर विशेष नजर

वाराणसी की स्नातक और शिक्षक, दोनों सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किए हैं। स्नातक सीट पर केदार नाथ सिंह और शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्रा चुनाव लड़ेंगे। वाराणसी और आसपास के जिलों में शिक्षकों तथा स्नातक मतदाताओं के बीच चुनावी संपर्क इन प्रत्याशियों के प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने दिनेश गोयल को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने अपने पिछले कार्यकाल के कामकाज को मतदाताओं के समक्ष रखने और स्थानीय मुद्दों पर समर्थन जुटाने की चुनौती होगी।

इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र से अशोक कुमार राठौर की उम्मीदवारी भी महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

शिक्षक सीटों पर पेंशन और सेवा सुरक्षा के मुद्दे

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में इस बार भी पुरानी पेंशन, समान कार्य के लिए समान वेतन, तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण और सेवा सुरक्षा जैसे विषय चर्चा में रह सकते हैं।

भाजपा ने वाराणसी शिक्षक सीट से प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर त्रिपाठी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को मैदान में उतारा है।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशियों को सरकारी, सहायता प्राप्त और पात्र निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़े पंजीकृत मतदाताओं तक पहुंचना होगा। अलग-अलग शिक्षक संगठनों की मांगें और स्थानीय शैक्षणिक परिस्थितियां भी चुनावी संवाद को प्रभावित कर सकती हैं।

समाजवादी पार्टी ने भी घोषित किए उम्मीदवार

भाजपा से पहले समाजवादी पार्टी ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से घोषित प्रत्याशियों में वाराणसी शिक्षक क्षेत्र से वर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव और लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से सुशील कुमार शामिल हैं।

पार्टी ने आगरा शिक्षक क्षेत्र से प्रकाशचंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली शिक्षक क्षेत्र से दानिश अख्तर और मेरठ शिक्षक क्षेत्र से नितिन तोमर को प्रत्याशी बनाया है।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार उतारे हैं। वाराणसी स्नातक क्षेत्र से वर्तमान एमएलसी आशुतोष सिन्हा, झांसी स्नातक क्षेत्र से डॉ. मान सिंह, आगरा स्नातक क्षेत्र से शशांक यादव, मेरठ स्नातक क्षेत्र से परमिंदर भाटी और लखनऊ स्नातक क्षेत्र से कांति सिंह को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

दोनों दलों की घोषणाओं के बाद संबंधित क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। हालांकि अंतिम मुकाबले की तस्वीर नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भागीदारी भी चुनावी समीकरणों का हिस्सा होगी।

भाजपा ने संगठन को दी चुनावी जिम्मेदारी

भाजपा ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के लिए संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के सामने पंजीकृत मतदाताओं तक पहुंचने और शिक्षण संस्थानों से संपर्क स्थापित करने का लक्ष्य रहेगा।

इन चुनावों में मतदाता सूची का विशेष महत्व होता है। सामान्य विधानसभा चुनावों की तुलना में मतदाताओं की संख्या और उनकी पात्रता अलग होने के कारण राजनीतिक दलों को क्षेत्रवार रणनीति बनानी पड़ती है।

भाजपा के प्रत्याशियों के लिए शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर संवाद स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की तैयारी में हैं।

सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है मतदान प्रक्रिया

विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर मतदान सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में केवल निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले और संबंधित मतदाता सूची में पंजीकृत लोग ही मतदान कर सकते हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य वैधानिक शर्तें पूरी करने वाले मतदाता भाग लेते हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित अवधि तक पात्र शिक्षण संस्थानों में अध्यापन करने वाले पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं।

इस चुनाव में मतदाताओं के लिए प्रत्याशियों का शैक्षणिक दृष्टिकोण, शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं पर उनकी स्थिति और स्नातकों से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां सामान्य विधानसभा क्षेत्रों से अलग होती हैं। यहां चुनाव प्रचार का बड़ा हिस्सा शिक्षण संस्थानों, शिक्षक संगठनों, विश्वविद्यालयों और पंजीकृत स्नातक मतदाताओं के बीच केंद्रित रहता है।

शिक्षक मतदाताओं के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था, वेतन विसंगतियां, पदोन्नति, स्थानांतरण नीति और शिक्षण संस्थानों में रिक्त पदों जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। दूसरी ओर स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, उच्च शिक्षा और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

प्रत्याशियों के सामने इन मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करने और मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की चुनौती होगी।

विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे विधान परिषद चुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। हालांकि दोनों चुनावों के मतदाता वर्ग और निर्वाचन प्रक्रिया अलग हैं, फिर भी शिक्षक और स्नातक क्षेत्रों में दलों के संगठनात्मक प्रयासों पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर रहेगी।

भाजपा की छह प्रत्याशियों वाली सूची और समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार घोषणा के बाद अब चुनाव प्रचार, नामांकन और मतदाताओं से संपर्क की गतिविधियां आगे बढ़ेंगी।

अंतिम उम्मीदवार सूची सामने आने के बाद प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबले की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल शिक्षक और स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर दोनों दलों के प्रत्याशियों की रणनीति और चुनावी प्रचार महत्वपूर्ण रहेगा।

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