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पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं, 24 घंटे आतिशबाजी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख समय के साथ अलग-अलग आदेशों में विकसित हुआ है। 2018 के एक आदेश में अदालत ने कम उत्सर्जन वाले पटाखों को अनुमति देने और कुछ हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक से जुड़े निर्देश दिए थे। दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर विशेष शर्तें भी तय की गई थीं...

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 30, 2026 3:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम बातें सामने आई हैं। अदालत ने संकेत दिया कि पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि लोग लगातार 24 घंटे आतिशबाजी करते रहें। कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं, लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच संतुलन कायम करने की जरूरत पर जोर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पटाखों के इस्तेमाल को लेकर ऐसा व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है, जिसमें त्योहार मनाने की परंपरा और प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं दोनों को ध्यान में रखा जा सके। अदालत के सामने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की स्थिति और पटाखों से होने वाले संभावित प्रभाव का मुद्दा भी रहा है।

सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की निगरानी करता रहा है। इससे पहले भी अदालत ने कम उत्सर्जन वाले ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल, उनके प्रमाणन और बिक्री से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 2025 के आदेश में अदालत ने दिल्ली-NCR में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल को लेकर समय और अन्य शर्तों के साथ व्यवस्था तय की थी। मौजूदा सुनवाई में पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और उनसे निकलने वाले प्रदूषकों का मुद्दा भी उठा। केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से संबंधित परीक्षणों और तकनीकी पहलुओं पर अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है। खास तौर पर बेरियम आधारित पटाखों को लेकर जांच और परीक्षण का विषय अदालत के सामने रहा।

अदालत यह भी देख रही है कि पटाखों के संयुक्त फायर टेस्ट के जरिए उनके ध्वनि स्तर और अन्य प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन किस तरह किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित संस्थाओं को अतिरिक्त समय दिए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य पटाखों के संबंध में किसी भी नियामकीय व्यवस्था को वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार देना है। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी सामने आया कि क्या सभी तरह के पटाखों के लिए एक समान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए या दिल्ली-NCR की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग नियम बनाए जाने चाहिए।

पटाखा निर्माताओं की ओर से अदालत में यह दलील रखी गई कि दिल्ली को देश के अन्य हिस्सों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति को देखते हुए क्षेत्र विशेष के लिए अलग प्रतिबंधों की आवश्यकता पर भी बहस होती रही है। अदालत के सामने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया गया। सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि दिवाली के आसपास फसल अवशेष जलाने की घटनाएं भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में दिल्ली-NCR के प्रदूषण को केवल पटाखों से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं होगा। हालांकि, पटाखों से होने वाले उत्सर्जन और उसके स्वास्थ्य प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन भी जरूरी माना गया है।

सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों में भी प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन करने पर जोर दिया गया है। 15 अक्टूबर 2025 के आदेश में अदालत ने CPCB और CSIR-NEERI को दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण में पटाखों के योगदान और उनके उत्सर्जन के स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन करने का निर्देश दिया था। अदालत के सामने यह पहलू भी रहा कि पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद उसका प्रभावी क्रियान्वयन हमेशा आसान नहीं होता। सितंबर 2025 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर संतुलित समाधान तैयार करने की जरूरत बताई थी। अदालत ने ग्रीन पटाखों के प्रमाणन और उनके निर्माण से जुड़े पहलुओं पर भी संबंधित संस्थाओं को काम करने को कहा था।

पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख समय के साथ अलग-अलग आदेशों में विकसित हुआ है। 2018 के एक आदेश में अदालत ने कम उत्सर्जन वाले पटाखों को अनुमति देने और कुछ हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक से जुड़े निर्देश दिए थे। दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर विशेष शर्तें भी तय की गई थीं।  अदालत की कोशिश ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है जिसमें त्योहार के दौरान पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाया जा सके। इसके लिए पटाखों के प्रकार, रासायनिक संरचना, ध्वनि स्तर और इस्तेमाल की समय-सीमा जैसे पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होने की बात कही गई है। उस दौरान CPCB और केंद्र सरकार की ओर से परीक्षणों तथा बेरियम से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर आगे की जानकारी अदालत के सामने रखी जा सकती है। इसके बाद दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर समय, प्रकार और अन्य शर्तों से संबंधित व्यवस्था पर अदालत आगे निर्देश दे सकती है। फिलहाल अदालत के रुख से इतना स्पष्ट है कि पटाखों को लेकर न तो बिना शर्त इस्तेमाल की अनुमति का रास्ता अपनाया जा रहा है और न ही पूरे देश में एक समान पूर्ण प्रतिबंध को समाधान माना जा रहा है। अंतिम व्यवस्था अदालत द्वारा उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी, पर्यावरणीय स्थिति और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद तय की जाएगी।

 

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