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दिल्ली दंगा केस में उमर और शरजील की जमानत याचिका खारिज

हाईकोर्ट के समक्ष दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। बचाव पक्ष की ओर से जमानत के पक्ष में दलीलें दी गईं, जबकि अभियोजन ने इसका विरोध किया। मामले में यूएपीए की धाराएं भी लागू हैं, जिसके तहत जमानत के लिए कानून में विशेष शर्तें निर्धारित हैं...

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Gauravshali Bharat News
  • September 30, 2026 1:25 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर राहत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। दोनों आरोपियों की ओर से कड़कड़डूमा कोर्ट के 4 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी तीसरी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।

मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित FIR 59/2020 और उससे जुड़ी कथित व्यापक साजिश की जांच से जुड़ा है। इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। अभियोजन पक्ष ने दोनों पर कथित साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका होने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अभी ट्रायल में होना है और अदालतों के जमानत संबंधी आदेशों को दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता।

उमर खालिद की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपील कड़कड़डूमा कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ थी, जिसमें 4 जुलाई को उनकी तीसरी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट के 31 जुलाई 2026 के आदेश में दर्ज है कि अपील के साथ अंतरिम जमानत की मांग भी की गई थी। अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और शरजील इमाम की अपील को भी इसी मामले से जुड़े होने के कारण साथ सूचीबद्ध किया।  इससे पहले जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज किया था। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले में दोनों के मामलों पर अलग-अलग सामग्री और कथित भूमिकाओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट में जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। हाईकोर्ट के समक्ष दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। बचाव पक्ष की ओर से जमानत के पक्ष में दलीलें दी गईं, जबकि अभियोजन ने इसका विरोध किया। मामले में यूएपीए की धाराएं भी लागू हैं, जिसके तहत जमानत के लिए कानून में विशेष शर्तें निर्धारित हैं। इस केस में पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में उमर खालिद और शरजील इमाम से जुड़ी अपीलों पर विस्तृत फैसला सुनाया था। उस समय अदालत ने अभियोजन की ओर से दोनों पर लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री पर चर्चा की थी। बाद में दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

 दिल्ली पुलिस ने दोनों की जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का हवाला दिया। पुलिस की दलीलों के मुताबिक, मामले में उनकी कथित भूमिका व्यापक साजिश से जुड़ी है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष लगातार जमानत की मांग कर रहा है और मुकदमे की अवधि तथा हिरासत की लंबाई जैसे पहलुओं को अदालत के सामने रखता रहा है।

फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम को इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। जमानत याचिकाओं का खारिज होना मामले में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।

 

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