• होम
  • दिल्ली/NCR
  • जंतर-मंतर पर बड़ा सियासी प्रदर्शन, पूर्व CM आतिशी हिरासत में

जंतर-मंतर पर बड़ा सियासी प्रदर्शन, पूर्व CM आतिशी हिरासत में

गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन ने शुक्रवार को राजनीतिक माहौल गरमा दिया।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 2, 2026 3:19 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली, । गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन ने शुक्रवार को राजनीतिक माहौल गरमा दिया। प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं के साथ विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और AAP विधायक आतिशी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, विधायक संजीव झा और राज्यसभा सांसद संजय सिंह सहित कई नेता व कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।

प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों और विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दिए जाने और कानून-व्यवस्था से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी।

जंतर-मंतर पहुंचने की अपील के बाद बढ़ी हलचल

प्रदर्शन से एक दिन पहले आतिशी ने लोगों से 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने चुनावी मताधिकार और मतदाता सूची को लेकर अपनी चिंता सार्वजनिक रूप से रखी। AAP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इन आरोपों को पार्टी नेताओं के दावे के रूप में देखा जा रहा है।

AAP सांसद संजय सिंह ने भी प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का आरोप लगाया और इसे लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पुलिस ने पहले ही बढ़ा दी थी सुरक्षा

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिस तथा सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। पुलिस के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे, जिसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति के निर्धारित प्रकार की सभाओं, जुलूसों और प्रदर्शनों पर रोक थी।

पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा संबंधी तैयारियां की गई थीं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए अलग-अलग स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को अशोक रोड के आसपास भी रोका गया।

500 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती तौर पर हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या कम बताई थी, लेकिन बाद में यह संख्या 500 के आसपास पहुंच गई। AAP नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी भी प्रदर्शन में पहुंचीं और बाद में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और अन्य नेताओं को भी पुलिस ने रोका। राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी उत्तर एवेन्यू के पास रोककर आगे बढ़ने से रोके जाने की जानकारी सामने आई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा सहित कई अन्य लोग भी हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए अलग-अलग पुलिस थानों में ले जाया गया।

छात्र संगठनों की भी भागीदारी

प्रदर्शन में केवल राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए। AISA, SFI, DYFI और NSUI से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी चुनावी सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।

SFI और DYFI से जुड़े समूहों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से पहले ही रोक दिया गया।

दिल्ली में यातायात और मेट्रो सेवाओं पर असर

प्रदर्शन के मद्देनजर मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था का असर यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ा। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई। कुछ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार भी अस्थायी रूप से बंद किए गए, जबकि कुछ स्थानों पर इंटरचेंज सुविधा जारी रहने की जानकारी सामने आई।

इससे नई दिल्ली और केंद्रीय दिल्ली के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए लोगों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचने और पुलिस निर्देशों का पालन करने की अपील की गई।

SIR को लेकर जारी है राजनीतिक बहस

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही बहस जारी है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, प्रशासन और चुनाव व्यवस्था से जुड़े पक्षों की ओर से प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत संचालित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

जंतर-मंतर का शुक्रवार का घटनाक्रम इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों की हिरासत और सुरक्षा व्यवस्था ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से इस मुद्दे पर आगे भी कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।

फिलहाल जंतर-मंतर और नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। चुनावी मतदाता सूची, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर जारी यह विवाद आने वाले समय में राजनीतिक तथा सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

यह लेख उपलब्ध ताजा रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर स्वतंत्र भाषा में तैयार किया गया है। आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है; किसी स्रोत की सामग्री को शब्दशः पुनरुत्पादित नहीं किया गया है।

Advertisement