नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के विभिन्न कॉलेजों की छात्राओं की ओर से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हाल के दिनों में आयोजित विरोध प्रदर्शनों ने कैंपस और उसके आसपास के सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। 28 सितंबर 2026 को मिरांडा हाउस से जुड़े छात्रों और अन्य DU कॉलेजों के प्रतिभागियों ने “Hum Auratein Aazaad Hain” नाम से सॉलिडैरिटी मार्च निकाला। इससे पहले भी दक्षिणी दिल्ली में DU के अलग-अलग कॉलेजों के छात्रों ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मार्च और प्रदर्शन किए थे।
इन प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में छात्राएं अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करती दिखाई दे रही हैं। वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट में एक छात्रा कॉलेज के बाहर सुरक्षा से जुड़ी अपनी चिंता व्यक्त करती नजर आती है। वीडियो में छात्राओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों और कॉलेज परिसरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, किसी वायरल वीडियो में कही गई व्यक्तिगत बात को पूरे विश्वविद्यालय या सभी छात्राओं की स्थिति का प्रतिनिधि मानने से पहले स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
महिलाओं की सुरक्षा बनी छात्राओं के आंदोलन का केंद्र
28 सितंबर के मार्च में दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों से छात्राओं ने हिस्सा लिया। रिपोर्टों के अनुसार मार्च मिरांडा हाउस से शुरू होकर नॉर्थ कैंपस स्थित फैकल्टी ऑफ आर्ट्स की ओर गया। प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा महिलाओं और जेंडर माइनॉरिटीज के लिए सुरक्षित कैंपस तथा सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग थी।
इस आंदोलन का संदर्भ दिल्ली के कालकाजी क्षेत्र में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद सामने आया। इस घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए।
छात्राओं की चिंताओं में केवल कॉलेज परिसर की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कॉलेज तक पहुंचने वाली सड़कें, पार्क, परिवहन सुविधाएं और आसपास के सार्वजनिक स्थान भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा को केवल हॉस्टल कर्फ्यू या छात्राओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के बजाय बुनियादी ढांचे और संस्थागत सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने की मांग रखी।
कर्फ्यू नहीं, सुरक्षित माहौल की मांग
प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्टों में छात्राओं ने रात में महिलाओं की आवाजाही सीमित करने जैसे उपायों पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क रहा कि महिलाओं की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के बजाय उन परिस्थितियों को बेहतर किया जाना चाहिए जिनमें अपराध की आशंका पैदा होती है।
मिरांडा हाउस से जुड़े मार्च के दौरान स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय, DTC शटल सेवाओं की उपलब्धता और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े मुद्दे उठाए गए। कुछ रिपोर्टों के अनुसार छात्रों ने मेट्रो यात्रा में रियायत और कैंपस के आसपास बेहतर रोशनी जैसी मांगें भी रखीं।
यानी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह सवाल है कि छात्राओं को सुरक्षित रखने के लिए उनकी आवाजाही कम की जाए या फिर उन सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाया जाए जहां वे पढ़ाई, काम और दैनिक जीवन के लिए जाती हैं।
DU के कई कॉलेजों में पहले भी उठी आवाज
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर यह प्रदर्शन एक अकेली घटना नहीं है। सितंबर 2026 में लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज और अन्य संस्थानों से जुड़े छात्रों ने भी सुरक्षा के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किए।
23 सितंबर को LSR और अन्य DU कॉलेजों की छात्राओं ने भी सॉलिडैरिटी मार्च किया था। इस दौरान CCTV कैमरों की कार्यक्षमता, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग और कॉलेज के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने जैसी मांगें सामने आईं।
इसके बाद 25 सितंबर के आसपास दक्षिण दिल्ली में भी विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मार्च किया। DU Beat की रिपोर्ट के अनुसार उस प्रदर्शन में छात्रों ने सार्वजनिक स्थानों, CCTV निगरानी और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं उठाईं।
इस तरह अलग-अलग कॉलेजों से उठती आवाजों ने महिला सुरक्षा को विश्वविद्यालय स्तर की चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं पर जोर
छात्राओं द्वारा उठाए गए मुद्दों में कई ऐसे हैं जिनका संबंध सीधे बुनियादी नागरिक सुविधाओं से है। पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, काम करने वाले CCTV कैमरे, सार्वजनिक परिवहन, पुलिस पेट्रोलिंग और सुरक्षित पैदल मार्ग किसी भी बड़े शैक्षणिक परिसर के आसपास सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हालिया घटनाओं के बीच प्रकाश व्यवस्था, निगरानी, सार्वजनिक परिवहन और पुलिस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि, किसी एक घटना या प्रदर्शन के आधार पर पूरे दिल्ली विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को असुरक्षित या सुरक्षित घोषित करना उचित नहीं होगा। अलग-अलग कॉलेजों की भौगोलिक स्थिति, प्रवेश-निकास व्यवस्था, आसपास के बाजार, परिवहन केंद्र और स्थानीय पुलिस व्यवस्था अलग हो सकती है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है। स्क्रीनशॉट में दिखाई दे रही छात्रा कथित तौर पर कॉलेज के बाहर के माहौल और महिलाओं से जुड़े अनुभवों पर बात करती नजर आती है। वीडियो में कुछ छात्राएं अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करती दिखाई देती हैं।
ऐसे वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं, लेकिन सोशल मीडिया सामग्री की सत्यता, वीडियो का पूरा संदर्भ और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि करना जरूरी है। किसी छात्रा का व्यक्तिगत अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन उसे पूरे संस्थान की आधिकारिक स्थिति या सभी छात्राओं के अनुभव के रूप में प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।
अब नजर प्रशासनिक कदमों पर
छात्राओं के लगातार प्रदर्शन के बाद अब चर्चा इस बात पर भी है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित सरकारी एजेंसियां सुरक्षा से जुड़े सुझावों पर किस तरह कार्रवाई करती हैं। स्ट्रीट लाइट, CCTV, पुलिस गश्त, सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षित रास्तों जैसी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की मांग प्रदर्शनकारियों की ओर से सामने आई है।
महिला सुरक्षा का मुद्दा केवल किसी एक कॉलेज या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है। यह सार्वजनिक परिवहन, सड़क सुरक्षा, पुलिसिंग, शहरी नियोजन और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ा व्यापक विषय है। DU की छात्राओं द्वारा उठाई गई आवाज ने इन सवालों को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल, छात्राओं के इन प्रदर्शनों का मुख्य संदेश यही है कि शिक्षा हासिल करने वाली महिलाओं को कैंपस और उसके आसपास सुरक्षित वातावरण मिले और सुरक्षा के लिए उनकी स्वतंत्र आवाजाही पर ही मुख्य रूप से प्रतिबंध लगाने के बजाय बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। आने वाले समय में प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि इन मांगों का व्यावहारिक स्तर पर कितना असर दिखाई देता है।