विश्व हिंदी परिषद की अंतरराष्ट्रीय शाखा का भव्य आयोजन सम्पन्न

विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय हिंदी शाखा का ऑनलाइन आयोजन शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को रात्रि 7 बजे सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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  • October 4, 2026 7:11 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ/नई दिल्ली । विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय हिंदी शाखा का ऑनलाइन आयोजन शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को रात्रि 7 बजे सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देश-विदेश के हिंदीसेवियों, साहित्यकारों और परिषद के पदाधिकारियों ने सहभागिता करते हुए हिंदी को विश्वभाषा के रूप में स्थापित करने, भारतीय संस्कृति एवं विचार परंपरा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने और विश्व शांति के लिए भाषा की भूमिका पर विचार रखे।

कार्यक्रम का आयोजन विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार के नेतृत्व में किया गया। आयोजन के दौरान आगामी “भारतरत्न अटल : हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह सम्मेलन 30 और 31 अक्टूबर 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में प्रस्तावित है।

अटल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा

ऑनलाइन बैठक में आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियों की समीक्षा की गई। सम्मेलन के उद्देश्यों, दायित्वों के समन्वय और कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने अपने विचार साझा किए।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन से जुड़े विचारों को केवल साहित्यिक मंचों तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाया जाए। वक्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के हिंदी प्रेम, राष्ट्रवादी चिंतन और सुशासन की अवधारणा को वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक बताया।

गांधी दर्शन से विश्व शांति तक हिंदी की भूमिका

कार्यक्रम में आयोजित विषय-केंद्रित काव्य गोष्ठी में हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़े विभिन्न समकालीन विषयों पर रचनात्मक प्रस्तुतियां एवं विचार सामने आए। गोष्ठी का केंद्र राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार, हिंदी भाषा, हिंदी को विश्वभाषा के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता, विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, नारी शक्ति और शिक्षा जैसे विषय रहे।

साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भाषा को केवल संवाद का माध्यम न मानकर संस्कृति, मानवीय संवेदना और सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण आधार बताया। वक्ताओं के अनुसार विभिन्न देशों में हिंदी के प्रति बढ़ती रुचि भारतीय संस्कृति और साहित्य की वैश्विक पहुंच को दर्शाती है।

16 देशों के साहित्यकारों की सहभागिता

ऑनलाइन आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में विभिन्न देशों से हिंदीसेवी और साहित्यकार जुड़े। अमेरिका से डॉ. कादंबरी शंकर आदेश, दुर्गा सिन्हा उदार, डॉ. मयंक जैन और डॉ. मृदुल कीर्ति ने सहभागिता की।

जापान से डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. मधु खन्ना एवं श्रीमती रेखा राजवंशी, कतर से शालिनी वर्मा एवं विनीता कंवर तथा बहरीन से ममता तिवारी कार्यक्रम से जुड़ीं। इंडोनेशिया से इन्दु नांदल, लंदन से वंदना खुराना, मॉरीशस से डॉ. कल्पना लालजी और सऊदी अरब से आरती विमल परिख ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

इसी क्रम में स्पेन से पूजा अनिल भारवानी, कुवैत से संगीता चौबे पंखुड़ी तथा चीन से डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी सहित विभिन्न देशों में हिंदी के लिए कार्य कर रहे साहित्यकारों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

हिंदी को विश्वभाषा बनाने की दिशा में प्रयास

कार्यक्रम में हिंदी को विश्व स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं का कहना था कि भाषा किसी भी देश की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम होती है। हिंदी के व्यापक साहित्यिक संसार और भारत के बाहर रहने वाले हिंदीसेवियों की सक्रियता इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।

गोष्ठी में यह विचार भी सामने आया कि हिंदी का विस्तार केवल भाषा के प्रसार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके साथ भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों, पर्यावरणीय चेतना, शिक्षा और शांति के संदेश को भी वैश्विक मंचों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

पदाधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने की। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ. नन्दकिशोर साह ने किया, जबकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. डी. पी. मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

आयोजन में डॉ. शिप्रा मिश्रा, डॉ. लोकेश राठौर, डॉ. राघवेंद्र दुबे, डॉ. अनीता सिंह, प्रो. डॉ. अर्जुन चव्हाण, प्रो. रविंद्र कुमार गुप्ता, शंभु शरण मिश्रा, श्रवण कुमार, विजय प्रकाश, बी.एस. यादव, राजरत्नम पी., सचिन शर्मा, संगीता सिंह और सत्यम शिवम सुंदर सहित अनेक सदस्य जुड़े।

इसके अलावा सीमा कुमारी, सीमा कुशवाहा, सुनीता शेखावत, निक्की कुमारी, नितिशा कौशल, कामाख्या नारायण, गीता बजपाई, पिंकी गौड़, दुर्वा तिवारी, सुबोध भारद्वाज, विनोद कुमार, आरती यादव और दिनेश साहू सहित देश-विदेश के अनेक गणमान्य सदस्यों एवं हिंदीसेवियों की सहभागिता रही।

अटल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर उत्साह

विश्व हिंदी परिषद की इस ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय शाखा के माध्यम से आगामी सम्मेलन की तैयारियों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। 30 और 31 अक्टूबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाले “भारतरत्न अटल : हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन के विमर्श को वैश्विक मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन के माध्यम से हिंदी भाषा, भारतीय चिंतन और सुशासन से जुड़े विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। ऑनलाइन बैठक में देश-विदेश से जुड़े हिंदीसेवियों की सहभागिता ने इस अभियान को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

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