मुंबई: हिंदी सिनेमा और मराठी रंगमंच के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी शोक की लहर है। 75 वर्ष की उम्र में गुरुवार सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हो गया। उन्हें अचेत अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ कराने का फैसला किया है। सरकार की ओर से बताया गया कि मराठी रंगमंच के साथ मराठी और हिंदी सिनेमा में उनके लंबे और महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने भी इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए कहा कि नाना पाटेकर का योगदान केवल अभिनय तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े रहे।
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के डोणजे इलाके में स्थित उनके फार्महाउस पर किया जाएगा। यह जगह अभिनेता के बेहद करीब मानी जाती थी और वे यहां खेती-बाड़ी तथा प्रकृति के बीच समय बिताते थे। ताजा जानकारी के अनुसार उनके पार्थिव शरीर को गोवा से पुणे लाया जाएगा और इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर से बातचीत कर परिवार के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने परिवार को सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का भरोसा भी दिया। अभिनेता के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत, रंगमंच और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं थी। मराठी रंगमंच से अपने सफर की शुरुआत करने वाले नाना ने बाद में हिंदी सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी अभिनय शैली में संवादों की ताकत, चेहरे के भाव और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता दिखाई देती थी। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और नकारात्मक किरदारों तक उन्होंने कई तरह के चरित्र निभाए। उनकी आवाज और संवाद बोलने का अंदाज भी उनकी विशिष्ट पहचान बन गया था।
सिनेमा के साथ उनका सामाजिक पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा। अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ की शुरुआत की थी। इस संस्था का काम महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद से जुड़ा रहा है। जल संरक्षण, गांवों में पानी की उपलब्धता और किसानों से जुड़े संकटों पर संस्था ने कई स्तरों पर काम किया।
‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए किसान परिवारों की परेशानियों को सामने लाने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। संस्था के अनुसार, उसका उद्देश्य किसानों को संकट से उबरने में मदद करने के साथ ग्रामीण इलाकों में पानी और संसाधनों से जुड़े स्थायी समाधान तैयार करना भी रहा है। नाना पाटेकर इस सामाजिक काम से लंबे समय तक जुड़े रहे।
नाना पाटेकर के निधन से मराठी रंगमंच और हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसकी पहचान किसी एक शैली या भाषा तक सीमित नहीं रही। पर्दे पर उनकी मौजूदगी हमेशा प्रभावशाली रही और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें अभिनय की दुनिया से बाहर भी अलग पहचान दी। पुणे के उसी फार्महाउस में अब उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी, जिससे उनका वर्षों का भावनात्मक रिश्ता रहा।