लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कैबिनेट बैठक में किसानों और शहरी परिवहन से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं। सरकार ने धान खरीद के लिए 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही मक्का, बाजरा और ज्वार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किए गए हैं। वहीं, प्रदेश के 18 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना को भी आगे बढ़ाया गया है। इन फैसलों का उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों की सरकारी खरीद की सुविधा उपलब्ध कराने और शहरों में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने से जुड़ा है।
सरकार के फैसले के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद 15 अक्टूबर से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में खरीद प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू होगी और 28 फरवरी तक जारी रहेगी। दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग समयसीमा निर्धारित की गई है, ताकि फसल की आवक के अनुसार खरीद की व्यवस्था संचालित की जा सके।
इस सीजन में सरकार ने कुल 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश में 4,500 क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीद की जाएगी। सरकार ने आठ एजेंसियों को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस और मंडी परिषद के साथ एफपीओ, एफपीसी, एनसीसीएफ तथा नैफेड शामिल हैं।
इन एजेंसियों के जरिए किसानों से धान खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। खरीद प्रक्रिया में केंद्रों का संचालन, किसानों की उपज की खरीद और भुगतान समय पर सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा। सरकार के मुताबिक, खरीदे गए धान का भुगतान किसानों को 48 घंटे के भीतर किया जाएगा। इस व्यवस्था से किसानों को उपज बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, तय समयसीमा में भुगतान और खरीद लक्ष्य की पूर्ति का वास्तविक असर प्रक्रिया के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
योगी सरकार ने खरीफ फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किए हैं। फैसले के मुताबिक, मक्का का एमएसपी 2,410 रुपये प्रति क्विंटल, बाजरा का 2,900 रुपये प्रति क्विंटल और ज्वार का 4,073 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इन फसलों की खरीद अवधि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक रखी गई है।
एमएसपी वह निर्धारित मूल्य है, जिस पर सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत पात्र किसानों से फसल खरीदी जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए एक तय मूल्य उपलब्ध कराना है। मक्का, बाजरा और ज्वार जैसी फसलों के लिए समर्थन मूल्य तय होने से किसानों को अपनी उपज बेचने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि खरीद केंद्रों पर व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, खरीद की प्रक्रिया कितनी सुगम होती है और भुगतान समय पर किया जाता है या नहीं। निर्धारित अवधि के दौरान खरीद केंद्रों के संचालन और एजेंसियों की सक्रियता पर भी नजर रहेगी।
कैबिनेट बैठक में शहरी परिवहन को लेकर भी फैसला लिया गया है। सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इनमें अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, झांसी और मथुरा जैसे शहर शामिल हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से शहरी सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ाने की योजना है।
इलेक्ट्रिक बसें बिजली से चलती हैं और इनमें पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल नहीं होता। ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने का एक प्रमुख उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ यातायात विकल्प उपलब्ध कराने से जुड़ा है। शहरों में बस सेवा का विस्तार होने से यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस योजना का प्रभाव बसों की उपलब्धता, उनके संचालन की नियमितता, रूट निर्धारण और चार्जिंग सुविधाओं पर निर्भर करेगा। यात्रियों को लाभ पहुंचाने के लिए जरूरी होगा कि बसें जरूरत के मुताबिक मार्गों पर चलें और सेवा का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया जाए।
योगी कैबिनेट के इन फैसलों में कृषि खरीद और शहरी परिवहन, दोनों क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। धान खरीद के लिए बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने, मक्का-बाजरा-ज्वार के समर्थन मूल्य तय करने और इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना के जरिए सरकार ने किसानों तथा शहरों में सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने वाले लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है। अब इन फैसलों का लाभ जमीनी स्तर पर किस तरह मिलता है, यह खरीद व्यवस्था और परिवहन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा।