लखनऊ के पॉश इलाकों में जलभराव, लुलु मॉल मार्ग फिर पानी में डूबा

लखनऊ के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आना कई सवाल खड़े करता है। इकाना स्टेडियम और लुलु मॉल कीओर जाने वाला मार्ग शहर के महत्वपूर्ण रास्तों में गिना जाता है। इस मार्ग पर पानी भरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित...

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  • October 9, 2026 12:01 pm IST, Published 54 minutes ago
लखनऊ में जलभराव की समस्या ने एक बार फिर शहर की बुनियादी सुविधाओं और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इकानास्टेडियम से लुलु मॉल की ओर जाने वाले मार्ग पर पानी भरने की स्थिति सामने आई है। वहीं, प्लासियो मॉल के सामने भी जलभराव से लोगों कोपरेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी की पॉश कॉलोनियों में शामिल गोमती नगर एक्सटेंशन में भी पानी भरने की खबर है। इसकेअलावा ट्रिपल आईटी परिसर में बाढ़ का पानी घुसने की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है। इन परिस्थितियों ने शहर में जल निकासी के इंतजामों औरजलभराव से निपटने की तैयारियों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।लखनऊ के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आना कई सवाल खड़े करता है। इकाना स्टेडियम और लुलु मॉल कीओर जाने वाला मार्ग शहर के महत्वपूर्ण रास्तों में गिना जाता है। इस मार्ग पर पानी भरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहतीहै। सड़क पर जमा पानी के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। वहीं, कार चालकों को भी पानी की गहराई काअंदाजा लगाने में मुश्किल हो सकती है। ऐसी स्थिति में यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने के साथ ही लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने मेंअतिरिक्त समय लग सकता है।

प्लासियो मॉल के सामने जलभराव की स्थिति भी शहरी व्यवस्था के लिए चुनौती मानी जा रही है। मॉल और व्यावसायिक क्षेत्रों के आसपास बड़ीसंख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में सड़क पर पानी जमा होने से पैदल चलने वालों, ग्राहकों और आसपास के कारोबार से जुड़े लोगों को परेशानीहो सकती है। जलभराव के दौरान सड़क किनारे बने रास्तों और प्रवेश द्वारों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। यदि पानी लंबे समय तक जमारहता है, तो इससे स्थानीय लोगों की दिनचर्या और कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।

गोमती नगर एक्सटेंशन में जलभराव की खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र राजधानी के तेजी से विकसित हुए इलाकों में शामिलहै। यहां आवासीय परिसरों, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इसके बावजूद पानी भरने की समस्या सामने आने से जलनिकासी की क्षमता और बरसाती पानी की निकासी के इंतजामों पर सवाल उठते हैं। किसी भी विकसित आवासीय क्षेत्र में बेहतर सड़कें औरआधुनिक इमारतें तभी प्रभावी साबित होती हैं, जब वहां जल निकासी की व्यवस्था भी मजबूत हो। पानी जमा होने से स्थानीय निवासियों कोआवागमन के साथ-साथ दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी दिक्कत हो सकती है।

ट्रिपल आईटी परिसर में बाढ़ का पानी घुसने की सूचना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों में पानी पहुंचने सेपढ़ाई, प्रशासनिक गतिविधियों और अन्य आवश्यक कार्यों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा बिजली से जुड़े उपकरणों,प्रयोगशालाओं और अन्य संसाधनों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे हालात में परिसर से पानी निकालने, संवेदनशील स्थानों कोसुरक्षित रखने और विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय पर कदम उठाना जरूरी है।

शहर में अलग-अलग स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आने के बाद नगर निगम और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। नालों की सफाई, जल निकासी मार्गों की नियमित निगरानी, पानी निकालने वाले पंपों की उपलब्धता और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान जैसे उपाय इससमस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, जिन स्थानों पर बार-बार पानी भरता है, वहां स्थायी समाधान तलाशने की जरूरत है।केवल जलभराव होने के बाद पानी निकालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके कारणों का पता लगाकर भविष्य के लिए प्रभावी योजना बनाना भीआवश्यक है।

लखनऊ जैसे बड़े शहर में बारिश या बाढ़ के पानी से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियों के साथ नागरिकों की सतर्कता भी जरूरी है। लोगों कोजलमग्न रास्तों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचना चाहिए और पानी से ढके मार्गों पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए।फिलहाल इकाना से लुलु मॉल मार्ग, प्लासियो मॉल के सामने, गोमती नगर एक्सटेंशन और ट्रिपल आईटी परिसर में सामने आई स्थिति नेजलभराव की चुनौती को फिर चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संबंधित विभाग पानी की निकासी और भविष्य में ऐसीपरिस्थितियों से बचाव के लिए क्या कदम उठाते हैं।

 

 

 

 

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