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बैंक ऑफ बड़ौदा, PNB समेत कई बैंकों ने बढ़ाईं ब्याज दरें

ब्याज दरों में इस तरह के बदलाव का असर कर्ज लेने वालों की वित्तीय योजना पर पड़ सकता है। यदि किसी ग्राहक का होम लोन रेपो-लिंक्ड ब्याज दर पर है, तो दर में बढ़ोतरी के बाद उसकी EMI बढ़ सकती है या बैंक लोन की अवधि बढ़ा सकता है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 9, 2026 10:37 am IST, Published 21 minutes ago

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद अब बैंक ग्राहकों पर कर्ज का बोझ बढ़ने की आशंका है। कई बैंकों ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग दरों में इजाफा कर दिया है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिन्होंने रेपो रेट से जुड़ी ब्याज दरों पर होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है या नया कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं। ब्याज दरें बढ़ने से नए कर्ज पहले के मुकाबले महंगे हो सकते हैं। वहीं, मौजूदा कर्ज की मासिक किस्त (EMI) भी बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि में बदलाव हो सकता है। हालांकि, वास्तविक असर ग्राहक के लोन की शर्तों और बैंक की ब्याज दर तय करने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

आरबीआई के फैसले के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक सहित कई बैंकों ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग दरों में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दी है। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक की संबंधित दर 8.10 प्रतिशत से बढ़कर 8.35 प्रतिशत हो गई है। इंडियन बैंक ने भी अपनी रेपो-लिंक्ड बेंचमार्क लेंडिंग रेट में इजाफा करते हुए इसे 7.95 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.20 प्रतिशत कर दिया है। बैंक की नई दर 8 अक्टूबर से प्रभावी बताई गई है।

इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत कर दी है। बैंक ऑफ इंडिया और आरबीएल बैंक सहित अन्य बैंकों की दरों में भी बदलाव की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें उनके नियमों, बेंचमार्क और ग्राहकों की पात्रता के आधार पर अलग हो सकती हैं। इसलिए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे अपने बैंक से नई ब्याज दर और उससे होने वाले संभावित वित्तीय असर की जानकारी प्राप्त करें।

ब्याज दरों में बदलाव के बीच यूको बैंक ने भी 8 अक्टूबर से अपनी कई बेंचमार्क-लिंक्ड लेंडिंग दरों में संशोधन किया है। बैंक ने ट्रेजरी बिल से जुड़ी दरों में अलग-अलग अवधि के हिसाब से बढ़ोतरी की है। तीन महीने की ट्रेजरी बिल लिंक्ड रेट (TBLR) 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.30 प्रतिशत हो गई है। छह महीने की अवधि के लिए यह दर 5.55 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.70 प्रतिशत की गई है। वहीं, 12 महीने की TBLR में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि के बाद यह 5.70 प्रतिशत से बढ़कर 5.95 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

यूको बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों यानी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-sec) से जुड़ी ब्याज दरों में भी बदलाव किया है। बैंक की एक साल की G-sec दर 5.88 प्रतिशत से बढ़कर 6.26 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह 10 साल की G-sec यील्ड 7.09 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.32 प्रतिशत कर दी गई है। इसके अलावा, बैंक ने UCO Float के लिए रेपो-लिंक्ड दर 8.05 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.30 प्रतिशत और UCO Prime के लिए दर 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी है।

ब्याज दरों में इस तरह के बदलाव का असर कर्ज लेने वालों की वित्तीय योजना पर पड़ सकता है। यदि किसी ग्राहक का होम लोन रेपो-लिंक्ड ब्याज दर पर है, तो दर में बढ़ोतरी के बाद उसकी EMI बढ़ सकती है या बैंक लोन की अवधि बढ़ा सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक की ब्याज दर 7.50 प्रतिशत थी और उसमें 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि लागू होती है, तो नई दर 7.75 प्रतिशत हो जाएगी। हालांकि, हर ग्राहक पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा। जिन लोगों को जल्द नया लोन लेना है, उन्हें अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और अन्य शर्तों की तुलना करनी चाहिए। मौजूदा कर्जधारकों को भी बैंक से यह पता करना चाहिए कि नई दर उनके लोन पर कब और किस तरह लागू होगी।

 

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