महंगाई की चिंता के बीच RBI ने बढाया रेपो रेट

RBI का नया रुख इस बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई के जोखिम को लेकर सतर्क है, लेकिन साथ ही आर्थिक विकास की गति को भी बनाए रखना चाहता है। ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का अर्थ यह है कि आगे के फैसले महंगाई, विकास, तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति और वैश्विक घटनाक्रम जैसे आंकड़ों पर निर्भर रहेंगे। यानी रेपो रेट में आज की बढ़ोतरी के बाद आगे भी दरें...

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  • October 7, 2026 12:37 pm IST, Published 49 minutes ago

भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई के बढ़ते दबाव और अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार के बीच मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव किया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। यह फरवरी 2023 के बाद रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। छह सदस्यीय समिति ने इस फैसले के पक्ष में सर्वसम्मति से मतदान किया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और ऊर्जा कीमतों के कारण चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और आर्थिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती दिखाई दे रही है। हालांकि, केंद्रीय बैंक के आकलन में महंगाई का परिदृश्य पिछले वर्ष की तुलना में अब उतना अनुकूल नहीं रहा है। मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई के जोखिम को देखते हुए मौद्रिक नीति को फिर से सख्त करना जरूरी हो गया है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान पहले के 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार आने वाली तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन करीब 5.8 प्रतिशत रह सकती है। कोर महंगाई के लिए वित्त वर्ष का अनुमान 4.4 प्रतिशत रखा गया है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई थी, जो RBI के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही।

महंगाई के दबाव के पीछे कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेजी, कमजोर मानसून और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कारकों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। RBI ने यह भी संकेत दिया है कि रुपये में कमजोरी और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी घरेलू महंगाई के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। केंद्रीय बैंक के आकलन के मुताबिक बेसलाइन की तुलना में रुपये में 5 प्रतिशत की गिरावट होने पर हेडलाइन महंगाई में करीब 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त तेजी महंगाई को करीब 50 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि महंगाई की चिंता के बावजूद RBI ने आर्थिक विकास के अनुमान को कम नहीं किया है, बल्कि उसे बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है। पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च को इसके पीछे प्रमुख कारणों में माना गया है। दूसरी तिमाही के विकास अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत और तीसरी तिमाही के अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत किया गया है। चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत का अनुमान बरकरार रखा गया है।

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों से मिलने वाले कर्ज की लागत पर पड़ सकता है। होम लोन, वाहन ऋण और कारोबारी कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर ब्याज दरों का दबाव बढ़ने की संभावना है, हालांकि इसका वास्तविक असर अलग-अलग बैंकों की नीतियों और पुराने कर्ज की शर्तों पर निर्भर करेगा। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी डेवलपर्स और खरीदारों के फैसले प्रभावित हो सकते हैं। खासकर नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग महंगी होने से कंपनियां निवेश और विस्तार को लेकर अधिक सावधानी बरत सकती हैं।

कमर्शियल रियल एस्टेट और रिटेल प्रॉपर्टी बाजार पर भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर पड़ सकता है। महंगे वित्तपोषण के कारण कुछ नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत में देरी संभव है, जबकि मजबूत मांग वाले प्रीमियम और अच्छी लोकेशन वाले प्रोजेक्ट्स अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इस माहौल में निवेशकों और डेवलपर्स के लिए नकदी प्रवाह और परियोजनाओं की व्यवहार्यता पर अधिक ध्यान देना जरूरी होगा।

तरलता के मोर्चे पर RBI ने तत्काल कोई अतिरिक्त रिजर्व रेशियो बढ़ोतरी जैसी घोषणा नहीं की है। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रबंधन विभिन्न उपलब्ध साधनों के जरिए किया जाएगा। इससे फिलहाल वित्तीय बाजार में अत्यधिक अचानक बदलाव के बजाय चरणबद्ध तरीके से सख्ती का संकेत मिलता है।  RBI का नया रुख इस बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई के जोखिम को लेकर सतर्क है, लेकिन साथ ही आर्थिक विकास की गति को भी बनाए रखना चाहता है।

‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का अर्थ यह है कि आगे के फैसले महंगाई, विकास, तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति और वैश्विक घटनाक्रम जैसे आंकड़ों पर निर्भर रहेंगे। यानी रेपो रेट में आज की बढ़ोतरी के बाद आगे भी दरें बढ़ेंगी ही, ऐसा निश्चित नहीं है|बुधवार के फैसले के बाद बाजार की नजर अब आने वाले महंगाई आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी। यदि महंगाई का दबाव बना रहता है तो केंद्रीय बैंक आगे भी सख्त रुख अपना सकता है, जबकि परिस्थितियों में सुधार होने पर दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की गुंजाइश रहेगी।

 

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