UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस भारत में रोजमर्रा के लेनदेन का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। दुकानों पर खरीदारी से लेकर ऑनलाइन सेवाओं के भुगतान तक, बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन के जरिए तुरंत पैसे भेजते हैं। इसकी लोकप्रियता की एक वजह भुगतान की सरल प्रक्रिया और आम उपभोक्ताओं के लिए इसकी कम लागत है। ऐसे में UPI लेनदेन पर किसी शुल्क से जुड़ा बदलाव ग्राहकों, दुकानदारों और भुगतान सेवा प्रदाताओं सभी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
MDR का पूरा नाम मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह वह शुल्क होता है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से लेनदेन की प्रक्रिया के बदले लिया जा सकता है। भुगतान व्यवस्था के अनुसार, इस शुल्क का भुगतान व्यापारी, बैंक या अन्य संबंधित सेवा प्रदाता के बीच निर्धारित नियमों के तहत होता है। हालांकि, MDR का नाम सामने आने का यह अर्थ नहीं है कि हर UPI भुगतान पर सीधे ग्राहक से अतिरिक्त पैसा लिया जाएगा। किसी भी शुल्क का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियम किन लेनदेन पर लागू होते हैं और भुगतान का खर्च किस पक्ष को उठाना है।
त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। दिवाली से पहले कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना-चांदी और घरेलू सामान की बिक्री में तेजी आती है। इस अवधि में व्यापारी डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे समय में MDR लागू करने की समयसीमा बढ़ाने से कारोबारियों को अतिरिक्त तैयारी का अवसर मिल सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनिंदा व्यापारी UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का फैसला दिवाली के तुरंत बाद प्रभावी होगा, हालांकि नई तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है।
पहले प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की बात थी। कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग दरों का प्रावधान भी बताया गया था। लेकिन इस शुल्क का मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर ग्राहकों को अतिरिक्त रकम देनी होगी। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, व्यक्तियों के बीच होने वाले UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और छोटे कारोबारियों की निर्धारित श्रेणी के लेनदेन भी शुल्क से मुक्त रहेंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन पर इस व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व का स्रोत तैयार करना बताया गया है। भुगतान प्रणाली को संचालित करने, तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर रखने के लिए खर्च होता है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठनों की चिंता है कि त्योहारों के दौरान किसी नए शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में समयसीमा को आगे बढ़ाने से भुगतान कंपनियों और कारोबारियों को व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करने का समय मिल सकता है।
फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि UPI से पैसे भेजने और प्राप्त करने वाले सामान्य व्यक्तिगत लेनदेन पर शुल्क लगाने की घोषणा नहीं हुई है। चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर MDR लागू होने की तारीख और अंतिम नियमों को लेकर आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है। दिवाली के बाद लागू होने की खबर के बावजूद नई तारीख की औपचारिक पुष्टि का इंतजार किया जाना चाहिए।