MDR शुल्क के विरोध में इंदौर-भोपाल में आज No UPI Day

व्यापारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि बड़े यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराना है। दूसरी ओर, नए MDR ढांचे के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे यूपीआई के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और सेवा व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है

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  • September 23, 2026 11:18 am IST, Published 51 minutes ago

भोपाल: मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में व्यापारियों के एक वर्ग ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में ‘नो UPI डे’ के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया। इंदौर में कारोबारियों ने एक दिन के लिए यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला किया, जबकि भोपाल में भी इसी तरह विरोध की पहल की गई। व्यापारियों का कहना है कि नए शुल्क से उनके कारोबार की लागत बढ़ सकती है |

इंदौर में टाइल्स और सैनिटरी वेयर कारोबार से जुड़े बड़ी संख्या में व्यापारी रीगल चौराहे पर एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान कारोबारियों ने यूपीआई शुल्क के खिलाफ पोस्टर और नारे लगाए। प्रदर्शन में 150 से अधिक व्यापारियों के शामिल होने का दावा किया गया। कई कारोबारियों ने अपने यूपीआई स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध जताया। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब बड़े लेनदेन पर शुल्क लगाने से व्यापारियों के सामने नई चुनौती खड़ी होगी।

व्यापारियों का विरोध उस नए MDR ढांचे को लेकर है, जिसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। इस शुल्क का भुगतान ग्राहक के बजाय संबंधित व्यापारी करेगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन इस शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।

नए नियम को लेकर कारोबारियों का कहना है कि कई क्षेत्रों में लाभ का मार्जिन पहले से सीमित है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों के संगठन इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि शुल्क व्यवस्था लागू रहती है तो वे बड़े भुगतान के लिए ग्राहकों को नकद या अन्य भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करने के लिए कह सकते हैं।

हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में ग्राहक के लिए यूपीआई भुगतान पर सीधे कोई ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं लगाया गया है। प्रस्तावित MDR व्यापारी की ओर से वहन किया जाना है और इसे ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं है। सरकार और NPCI की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा।

छोटे कारोबारियों को भी नए ढांचे में राहत दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को MDR से छूट जारी रहेगी। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के सामान्य पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा। इस वजह से रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान पहले की तरह जारी रहेंगे।

कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बीमा और कुछ अन्य श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की जगह पांच रुपये का फ्लैट MDR लागू होने की जानकारी दी गई है। इससे इन क्षेत्रों में बड़े यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लेने के बजाय शुल्क संबंधित व्यापारी या सेवा प्रदाता की ओर से वहन किया जाएगा।

मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप डीलरों ने भी नए शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के पेट्रोल पंप डीलरों ने 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है। डीलरों का तर्क है कि ईंधन कारोबार में मार्जिन सीमित होने के कारण प्रत्येक बड़े डिजिटल भुगतान पर MDR का असर पड़ेगा।

इंदौर और भोपाल में ‘नो UPI डे’ का विरोध इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। व्यापारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि बड़े यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराना है। दूसरी ओर, नए MDR ढांचे के पक्ष में यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे यूपीआई के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और सेवा व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर लागू होने वाले नए शुल्क का असर मुख्य रूप से व्यापारियों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों पर पड़ेगा। इंदौर और भोपाल में व्यापारियों का विरोध इस बदलाव को लेकर बाजार में मौजूद चिंता को सामने ला रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सरकार, भुगतान कंपनियों और व्यापारी संगठनों के बीच बातचीत का विषय बना रह सकता है।

 

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