महाराष्ट्र में खुले मसाला पाउडर की बिक्री पर प्रतिबंध

मिलावट रोकने के लिए एफडीए का सख्त आदेश मुंबई। मिलावटी मसालों की बिक्री पर रोक लगाने और लोगों की सेहत सुरक्षित रखने के लिए महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में खुले और बिना पैकेट वाले मसाला पाउडर तथा मिश्रित मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया […]

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  • October 16, 2026 9:23 am IST, Published 2 hours ago

मिलावट रोकने के लिए एफडीए का सख्त आदेश

मुंबई। मिलावटी मसालों की बिक्री पर रोक लगाने और लोगों की सेहत सुरक्षित रखने के लिए महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में खुले और बिना पैकेट वाले मसाला पाउडर तथा मिश्रित मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नए आदेश के अनुसार, मसालों को उत्पादन स्थल पर ही पैक करके सीलबंद करना होगा, ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच करना और उनके स्रोत का पता लगाना आसान हो सके।

महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि मसालों के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री से जुड़े कारोबारियों के लिए नए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य मसालों में मिलावट रोकना, हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।

हानिकारक रंगों और रसायनों पर सख्ती

एफडीए ने मसालों में मेटानिल येलो, रोडामाइन बी, सूडान रंग और लेड क्रोमेट जैसे हानिकारक रंगों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही है। इसके अलावा, मसालों को कीटाणुरहित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एथिलीन ऑक्साइड के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। एथिलीन ऑक्साइड के संपर्क में आने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, मसालों में कृत्रिम रंग या दूसरे प्रतिबंधित पदार्थ मिलाकर उन्हें अधिक आकर्षक दिखाना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए मसाला कारोबार से जुड़े सभी पक्षों को निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

ईंट का चूरा और लकड़ी का बुरादा मिलाने पर कार्रवाई

आयुक्त तुकाराम मुंढे ने चेतावनी दी है कि मसालों का वजन या मात्रा बढ़ाने के लिए उनमें ईंट का चूरा, चाक पाउडर, लकड़ी का बुरादा, स्टार्च अथवा अन्य अनधिकृत पदार्थ मिलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। घटिया गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर भी प्रशासन की नजर रहेगी।

इसके साथ ही मसालों को सार्वजनिक सड़कों, नालियों, कूड़ेदानों या पशुशालाओं के आसपास सुखाने की अनुमति नहीं होगी। मसालों के उत्पादन और भंडारण वाले स्थान साफ-सुथरे, सूखे और कीटों से मुक्त होने चाहिए। वहां मसालों के साथ कीटनाशक, औद्योगिक रंग, रसायन या अन्य हानिकारक पदार्थ रखने पर भी रोक रहेगी।

पैकेट पर दर्ज करनी होंगी जरूरी जानकारियां

नए नियमों के तहत मसालों के पैकेट पर उत्पाद का नाम, उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री, निर्माता का विवरण, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का लाइसेंस नंबर और बैच नंबर जैसी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इसके अलावा, निर्माण या पैकिंग की तारीख तथा उपयोग की अंतिम तारीख या गुणवत्ता बनाए रखने की अवधि का उल्लेख भी जरूरी होगा।

मसालों के उत्पादन और पिसाई से जुड़े कारोबारियों के पास एफएसएसएआई का वैध लाइसेंस होना चाहिए। मसालों की शुद्धता, प्राकृतिक होने या जैविक तरीके से तैयार किए जाने के संबंध में भ्रामक दावे करने वालों के खिलाफ भी खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

एफडीए ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। कार्रवाई के तहत मिलावटी या नियमों के विपरीत पाए गए उत्पाद जब्त करना, बिक्री रोकना, बाजार से उत्पाद वापस मंगाना, लाइसेंस निलंबित या रद्द करना और अदालत में मुकदमा चलाना शामिल है।

यह आदेश हल्दी, मिर्च, धनिया, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलायची, हींग, केसर, गरम मसाला, करी पाउडर और अन्य मसाला उत्पादों पर लागू होगा। इसके दायरे में निर्माता, प्रसंस्करण इकाइयां, थोक और खुदरा विक्रेता, ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियां, होटल, भोजनालय, खानपान सेवाएं और संस्थागत रसोईघर भी शामिल हैं।

महाराष्ट्र एफडीए के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मसालों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, मिलावट के स्रोत का पता लगाना और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। अब मसाला कारोबार से जुड़े सभी पक्षों को उत्पादन से लेकर बिक्री तक निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।

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