• होम
  • दिल्ली/NCR
  • दिल्ली में नकली ENO और Fevikwik फैक्ट्री का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली में नकली ENO और Fevikwik फैक्ट्री का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

नकली उत्पादों का कारोबार उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक नुकसान के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा कर सकता है। खासकर ऐसे उत्पादोंमें, जिनका इस्तेमाल स्वास्थ्य या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किया जाता है, उनकी गुणवत्ता और

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 20, 2026 2:40 pm IST, Published 1 hour ago

दिल्ली में नकली उत्पादों के कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने घोंडा और नांगलोई इलाके में छापेमारीकर कथित तौर पर नकली ENO और Fevikwik बनाने तथा उनकी पैकेजिंग करने के ठिकानों का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में दोआरोपियों नवीन सिंघल और बलराज बंसल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में पैक किए हुए नकली उत्पाद, खुले सैशे,ब्रांडेड कंपनियों के स्टिकर, पैकेजिंग सामग्री और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद की हैं। इस कार्रवाई के बाद नकली उपभोक्ताउत्पादों के निर्माण और बाजार में उनकी आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छापेमारी के दौरान करीब दो लाख पैक्ड नकली ENO सैशे बरामद किए गए। इसके अलावा 310 किलोग्राम सेअधिक खुले ENO सैशे भी जब्त किए गए हैं। जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, मौके पर लगभग चार लाख खुले सैशे होने की बात भी सामने आईहै। पुलिस को बड़ी संख्या में ENO के नाम और पहचान का इस्तेमाल करने वाली सामग्री भी मिली है। बरामदगी में तीन लाख से अधिक ENOस्टिकर शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल उत्पादों की पैकेजिंग को असली जैसा दिखाने के लिए किए जाने की आशंका है।

कार्रवाई के दौरान नकली Fevikwik के करीब 1.12 लाख सैशे भी जब्त किए गए। इसके साथ ही लगभग 200 किलोग्राम साइट्रिक एसिडबरामद होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुट सकती हैं कि बरामद रसायन का इस्तेमाल किस उद्देश्यसे किया जा रहा था और तैयार उत्पादों में किन सामग्रियों को मिलाया जाता था। हालांकि, उत्पादों की वास्तविक संरचना और उनकी गुणवत्ताकी पुष्टि संबंधित जांच तथा प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

छापेमारी में MDH समेत अन्य ब्रांडों की पैकेजिंग से जुड़ी सामग्री मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इससे जांच का दायरा बढ़ने कीसंभावना है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि बरामद पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल किन उत्पादों के लिए किया जाना थाऔर क्या इस कथित नेटवर्क के जरिए दूसरे ब्रांडों के नाम पर भी नकली सामान तैयार किया जा रहा था। फिलहाल, अन्य ब्रांडों से जुड़े किसी भीसंभावित मामले में विस्तृत जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

पुलिस ने कथित तौर पर नकली उत्पाद तैयार करने और उनकी पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक मशीनें भी जब्त की हैं। इतनी बड़ीमात्रा में तैयार सैशे, खुले उत्पाद और स्टिकर मिलने से आशंका जताई जा रही है कि इस गतिविधि के पीछे संगठित स्तर पर उत्पादन और आपूर्तिकी व्यवस्था हो सकती थी। जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि उत्पाद कहां तैयार किए जाते थे, उन्हें किन बाजारों में भेजा जाताथा और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

इस मामले में नवीन सिंघल और बलराज बंसल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में यह भीमहत्वपूर्ण होगा कि नकली उत्पादों की बिक्री किन माध्यमों से की जाती थी और क्या इन्हें सामान्य दुकानों या अन्य वितरण माध्यमों के जरिएग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा था। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।

नकली उत्पादों का कारोबार उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक नुकसान के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा कर सकता है। खासकर ऐसे उत्पादोंमें, जिनका इस्तेमाल स्वास्थ्य या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किया जाता है, उनकी गुणवत्ता और वास्तविक सामग्री की जानकारी बेहदमहत्वपूर्ण होती है। इसलिए उपभोक्ताओं को पैकेजिंग, निर्माता की जानकारी, बैच नंबर और अन्य जरूरी विवरणों की जांच करनी चाहिए।किसी उत्पाद की प्रामाणिकता पर संदेह होने पर संबंधित कंपनी या उपभोक्ता शिकायत तंत्र से संपर्क करना उचित है।

दिल्ली में हुई इस कार्रवाई ने नकली ब्रांडेड उत्पादों के कथित निर्माण और वितरण पर निगरानी की जरूरत को फिर उजागर किया है। अब जांचका मुख्य उद्देश्य बरामद सामग्री के स्रोत, तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और संभावित सप्लाई नेटवर्क का पता लगाना होगा।

Advertisement