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दिल्ली में कचरे से कमाई की तैयारी, रेखा गुप्ता ने शुरू किया बायोगैस प्लांट

इस परियोजना का एक अहम उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना भी है। गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तैयार होने पर उसे उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। जैविक खाद का इस्तेमाल खेती और बागवानी में किया जा सकता है, जबकि बायोगैस का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा के रूप में संभव है। यदि स्थानीय स्तर पर गोबर की खरीद, संग्रह और प्रसंस्करण की व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो इससे डेयरी संचालकों को भी लाभ मिल सकता है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 19, 2026 3:39 pm IST, Published 57 minutes ago

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बायोगैस प्लांट का उद्घाटन किया। इस संयंत्र के शुरू होने से राजधानी में गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छ ईंधन के उत्पादन और जैविक खाद की उपलब्धता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। योजना के मुताबिक, प्लांट में प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे डेयरी क्षेत्रों में जमा होने वाले गोबर का बेहतर इस्तेमाल होगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, गोयला डेयरी में स्थापित यह संयंत्र गोबर को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आमतौर पर डेयरी क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में गोबर निकलता है, जिसके उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने पर नालों और जलस्रोतों में प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। बायोगैस प्लांट के माध्यम से इस जैविक कचरे का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन और खाद तैयार करने के लिए किया जा सकेगा। इससे कचरे के प्रबंधन के साथ-साथ संसाधनों का दोबारा उपयोग करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

सरकार का दावा है कि गोयला डेयरी में शुरू की गई यह परियोजना गोबर को यमुना नदी तक पहुंचने से रोकने में मदद करेगी। दिल्ली में पशुपालन और डेयरी गतिविधियों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट का उचित निपटान लंबे समय से पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ा मुद्दा रहा है। यदि गोबर को व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर संयंत्र तक पहुंचाया जाता है, तो खुले स्थानों पर इसके जमा होने और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है। हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता नियमित संग्रह, परिवहन और संयंत्र की क्षमता के प्रभावी इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।

रेखा गुप्ता ने इस मौके पर पिछली सरकारों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में दिल्ली में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हुआ और बड़ी मात्रा में गोबर यमुना में पहुंचता रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने लगभग डेढ़ वर्ष के भीतर तीन बायोगैस प्लांट शुरू किए हैं और छह अन्य संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इन दावों के आधार पर सरकार राजधानी में जैविक कचरे के प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार करने की कोशिश कर रही है।

इस परियोजना का एक अहम उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना भी है। गोबर से बायोगैस और जैविक खाद तैयार होने पर उसे उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। जैविक खाद का इस्तेमाल खेती और बागवानी में किया जा सकता है, जबकि बायोगैस का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा के रूप में संभव है। यदि स्थानीय स्तर पर गोबर की खरीद, संग्रह और प्रसंस्करण की व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो इससे डेयरी संचालकों को भी लाभ मिल सकता है।

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मुख्यमंत्री ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ यानी कचरे से संपदा तैयार करने के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। इस अवधारणा के तहत ऐसे अपशिष्ट पदार्थों को उपयोगी उत्पादों में बदलने पर जोर दिया जाता है, जिन्हें सामान्यतः बेकार समझकर फेंक दिया जाता है। उद्घाटन कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर मोनिका पंत, विधायक संदीप सहरावत और दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

गोयला डेयरी का यह संयंत्र दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा और जैविक कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में गोबर का प्रसंस्करण कितना प्रभावी ढंग से होता है, कितनी बायोगैस और खाद तैयार होती है तथा इससे स्थानीय पशुपालकों और पर्यावरण को कितना लाभ मिलता है।

 

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