दिल्ली : दिल्ली में ई-रिक्शा चलाने वालों और इनसे सफर करने वाले यात्रियों के लिए परिवहन नियमों में बदलाव की तैयारी चर्चा में है। राजधानी में ट्रैफिक जाम, सड़क सुरक्षा और ई-रिक्शा के व्यवस्थित संचालन को ध्यान में रखते हुए एक नई ड्राफ्ट नीति का विवरण सामने आया है। इसमें ई-रिक्शा के पंजीकरण, चालकों के लाइसेंस, संचालन प्रमाणपत्र, यात्रियों की संख्या और सामान की अधिकतम सीमा जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल बताए गए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित नियमों में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम पांच ई-रिक्शा के पंजीकरण, ई-रिक्शा में चालक के अतिरिक्त चार यात्रियों और अधिकतम 40 किलोग्राम सामान की सीमा निर्धारित करने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, इन प्रावधानों को अंतिम रूप से लागू मानने से पहले दिल्ली सरकार या परिवहन विभाग की आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि करना जरूरी है। ड्राफ्ट नीति में सुझाव आमंत्रित किए जाने की बात भी सामने आई है।
दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, आवासीय कॉलोनियों और संकरी गलियों में ये यात्रियों को कम दूरी तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई इलाकों में अनियंत्रित पार्किंग, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने और यातायात नियमों की अनदेखी जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नीति का उद्देश्य ई-रिक्शा के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है। यदि प्रस्तावित प्रावधान लागू होते हैं, तो वाहन मालिकों, चालकों और ई-रिक्शा का व्यावसायिक संचालन करने वाली संस्थाओं को निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ सकता है।
नई व्यवस्था का संभावित असर केवल ई-रिक्शा चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यात्रियों की सुरक्षा, सड़क पर वाहनों की आवाजाही और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।
प्रस्तावित नियमों में व्यक्तिगत स्वामित्व के तहत ई-रिक्शा पंजीकरण की संख्या सीमित रखने की बात कही गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, किसी एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम पांच ई-रिक्शा पंजीकृत किए जा सकेंगे।
इस प्रावधान का उद्देश्य व्यक्तिगत पंजीकरण के माध्यम से बड़ी संख्या में वाहनों के संचालन को नियंत्रित करना हो सकता है। हालांकि, इससे जुड़े अंतिम नियम, पहले से पंजीकृत वाहनों पर इसका प्रभाव और मौजूदा मालिकों के लिए किसी छूट की व्यवस्था क्या होगी, यह आधिकारिक अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा।
नई दिल्ली में ई-रिक्शा से आजीविका चलाने वाले कई लोग वाहन खरीदकर स्वयं संचालन करते हैं, जबकि कुछ मालिक किराये पर वाहन देकर कमाई करते हैं। ऐसे में पंजीकरण की सीमा से संबंधित नियम लागू होने पर उन्हें अपने दस्तावेजों और स्वामित्व की स्थिति की जांच करनी चाहिए।
इस प्रस्तावित नीति का एक अहम पहलू राजधानी में ई-रिक्शा की कुल संख्या को नियंत्रित करना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में अधिकतम 2.5 लाख ई-रिक्शा रखने का प्रस्ताव है। जनवरी 2026 तक दिल्ली में लगभग 2.04 लाख ई-रिक्शा पंजीकृत होने की जानकारी भी सामने आई थी।
यदि यह सीमा अंतिम नीति में शामिल होती है, तो निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद नए पंजीकरण पर रोक लग सकती है, जब तक सरकार सीमा में बदलाव न करे। इस कदम का उद्देश्य राजधानी में बढ़ते वाहनों के दबाव और यातायात संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करना है।
हालांकि, इस प्रस्ताव का वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा, जब सरकार अंतिम नीति जारी करेगी और मौजूदा वाहन मालिकों के लिए लागू होने वाली शर्तों की जानकारी सामने आएगी।
प्रस्तावित योजना में ई-रिक्शा कंप्लायंस सर्टिफिकेट (ECC) को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत प्रत्येक ई-रिक्शा के लिए वैध प्रमाणपत्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। बताया गया है कि यह प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में जारी होगा और इसकी वैधता दो वर्ष होगी।
इस प्रमाणपत्र में वाहन के पंजीकरण, मालिक और चालक से संबंधित जानकारी के साथ बीमा, फिटनेस तथा बैटरी अनुपालन जैसे विवरण शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चलने वाले वाहनों के जरूरी दस्तावेज व्यवस्थित रहें।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, प्रमाणपत्र को एक वाहन और एक चालक से जोड़ा जा सकता है। इससे वाहन के संचालन और चालक की जिम्मेदारी निर्धारित करने में मदद मिल सकती है।
ई-रिक्शा चालकों को सलाह है कि वे अपने वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र, बीमा, फिटनेस से जुड़े दस्तावेज और ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्थित रखें। ECC के संबंध में अंतिम प्रक्रिया और समयसीमा की पुष्टि सरकारी अधिसूचना से करनी चाहिए।
ई-रिक्शा में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या बन सकता है। प्रस्तावित नीति के अनुसार, चालक के अतिरिक्त अधिकतम चार यात्रियों को बैठाने की अनुमति होगी। इसके साथ ही 40 किलोग्राम तक सामान ले जाने की सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव में चालक की सीट के बगल में यात्री बैठाने और वाहन में खड़े होकर सफर करने पर रोक लगाने की बात भी शामिल है। यदि ये नियम अंतिम रूप से लागू होते हैं, तो ई-रिक्शा चालकों को यात्रियों की संख्या पर विशेष ध्यान देना होगा।
यह व्यवस्था खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों के परिवहन के मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। कम जगह वाले वाहन में जरूरत से ज्यादा बच्चों को बैठाने से संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अभिभावकों और स्कूल संचालकों को भी सुरक्षित परिवहन व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।
प्रस्तावित नीति में ई-रिक्शा चालकों के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस और सार्वजनिक सेवा वाहन (PSV) बैज की अनिवार्यता का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले ई-रिक्शा प्रशिक्षित और पात्र चालक ही चलाएं।
यदि यह प्रावधान लागू होता है, तो चालकों को अपने लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की वैधता जांचनी होगी। वाहन मालिकों को भी यह सुनिश्चित करना पड़ सकता है कि उनके वाहन को चलाने वाला व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो।
इसके अलावा, प्रस्तावित योजना में ई-रिक्शा की अधिकतम गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा और मोटर की अधिकतम शक्ति 2,000 वॉट निर्धारित करने की बात भी सामने आई है। इन शर्तों का उद्देश्य वाहन की गति और तकनीकी मानकों को नियंत्रित करना है।
प्रस्तावित नीति में कंपनियों, फर्मों, सहकारी समितियों और अन्य पात्र संस्थाओं के लिए अधिकतम 100 ई-रिक्शा रखने की सीमा का उल्लेख है। वहीं, 25 या उससे अधिक ई-रिक्शा संचालित करने वाली कंपनियों और संस्थाओं के लिए एग्रीगेटर लाइसेंस की आवश्यकता का प्रस्ताव बताया गया है।
इस व्यवस्था के तहत बड़े स्तर पर ई-रिक्शा संचालन करने वाली संस्थाओं को नियमों के अनुरूप काम करना पड़ सकता है। चार्जिंग या बैटरी बदलने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान भी इस व्यवस्था का हिस्सा बताए गए हैं।
दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ई-रिक्शा नीति का उद्देश्य यातायात व्यवस्था सुधारना, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और वाहनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना है। इस ड्राफ्ट पर आम जनता और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।
ई-रिक्शा चालकों, वाहन मालिकों, स्कूल संचालकों और यात्रियों के लिए यह जरूरी है कि वे प्रस्तावित नियमों और अंतिम रूप से लागू होने वाले प्रावधानों के बीच अंतर समझें। फिलहाल इस नीति को अंतिम रूप से लागू नियम बताना उचित नहीं होगा। लोगों को दिल्ली परिवहन विभाग की आधिकारिक अधिसूचना पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष: दिल्ली में ई-रिक्शा संचालन को लेकर प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर वाहन मालिकों और चालकों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। पांच वाहनों की व्यक्तिगत सीमा, चार यात्रियों का प्रावधान, 40 किलो सामान की सीमा और ECC प्रमाणपत्र जैसे नियम इस नीति के प्रमुख बिंदु हैं। अंतिम निर्णय और लागू होने की तारीख की पुष्टि होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इनका असर किस तरह पड़ेगा।