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दिल्ली में हवा साफ करने का नया प्लान, पीएम2.5 और पीएम10 में 20% कमी का लक्ष्य

दिल्ली में बाहरी वातावरण की हवा साफ करने के लिए पहले भी कई प्रयोग किए जा चुके हैं। 2023 में आनंद विहार बस टर्मिनल, 2024 में खान मार्केट के पास ताज एम्बेसडर होटल और न्यू मोती बाग क्षेत्र तथा जनवरी 2025 में जंगपुरा के एक पेट्रोल पंप पर आउटडोर एयर प्यूरीफायर का परीक्षण हुआ था। इन प्रयोगों में निजी कंपनी यूमेंडस टेक्नोलॉजीज की विकसित तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। मई में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पश्चिमी दिल्ली के सतगुरु राम सिंह मार्ग पर लगाए गए 21 फिल्टरलेस एयर प्यूरीफायर और

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  • October 21, 2026 11:02 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने 104 करोड़ रुपये की नई योजना तैयार की है। इस योजना के तहत शहर के 40 प्रमुख प्रदूषण प्रभावित स्थानों पर निजी कंपनियों की मदद से हवा की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जाएगा। परियोजना की खास बात यह है कि कंपनियों को भुगतान उनके काम के परिणामों के आधार पर किया जाएगा। यानी केवल उपकरण लगाने या तकनीक इस्तेमाल करने से भुगतान नहीं मिलेगा, बल्कि प्रदूषण के स्तर में निर्धारित कमी दर्ज कराना भी जरूरी होगा।

योजना में कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, खान मार्केट, डिफेंस कॉलोनी, प्रमुख बस अड्डों, अस्पतालों और दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस जैसे व्यस्त इलाकों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कंपनियां अपनी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेंगी। हालांकि, उन्हें निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रदर्शन संबंधी शर्तों का पालन करना होगा।

सरकार की योजना के अनुसार, कंपनियों को भुगतान तभी मिलेगा जब उनके लगाए गए उपकरणों से पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर में कम से कम 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की जाएगी। इन दोनों प्रदूषकों का संबंध हवा में मौजूद सूक्ष्म और अपेक्षाकृत बड़े कणों से है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। यदि कोई कंपनी लगातार दो महीने तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करने में विफल रहती है, तो उसे नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए उसका अनुबंध समाप्त किया जा सकता है।

इस परियोजना को दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए परिणाम आधारित व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने इसे 40 अलग-अलग पैकेजों में बांटा है। प्रत्येक पैकेज की अनुमानित लागत करीब 2.6 करोड़ रुपये रखी गई है। हर स्थान के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली पात्र कंपनी का चयन किया जाएगा। हालांकि, किसी एक कंपनी को अधिकतम 10 स्थानों पर ही काम करने की अनुमति होगी।

दिल्ली में बाहरी वातावरण की हवा साफ करने के लिए पहले भी कई प्रयोग किए जा चुके हैं। 2023 में आनंद विहार बस टर्मिनल, 2024 में खान मार्केट के पास ताज एम्बेसडर होटल और न्यू मोती बाग क्षेत्र तथा जनवरी 2025 में जंगपुरा के एक पेट्रोल पंप पर आउटडोर एयर प्यूरीफायर का परीक्षण हुआ था। इन प्रयोगों में निजी कंपनी यूमेंडस टेक्नोलॉजीज की विकसित तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। मई में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पश्चिमी दिल्ली के सतगुरु राम सिंह मार्ग पर लगाए गए 21 फिल्टरलेस एयर प्यूरीफायर और अन्य परीक्षण उपकरणों का निरीक्षण भी किया था।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, आनंद विहार में हुए एक परीक्षण के दौरान पीएम2.5 में औसतन 30 प्रतिशत और पीएम10 में 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि, इसका प्रभाव स्थानीय क्षेत्र तक ही सीमित रहा। दूसरी ओर, वर्ष 2021 में कनॉट प्लेस में स्थापित स्मॉग टावर से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद इस तकनीक की प्रभावशीलता पर सवाल उठे। नई परियोजना में स्मॉग टावर लगाना अनिवार्य नहीं रखा गया है।

उपकरण स्थापित होने के बाद एक स्वतंत्र एजेंसी प्रदूषण के स्तर का आकलन करेगी। इसके लिए संबंधित स्थल के भीतर और बाहर की वायु गुणवत्ता की तुलना की जाएगी। भुगतान मासिक आधार पर होगा और केवल उन्हीं दिनों का भुगतान किया जाएगा, जब पीएम2.5 और पीएम10 दोनों में निर्धारित 20 प्रतिशत की कमी हासिल होगी। प्रारंभिक अनुबंध एक वर्ष का होगा। अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों के अनुबंध को एक-एक वर्ष के लिए दो बार बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए पिछले वर्ष में कम से कम 300 दिनों का सफल प्रदर्शन जरूरी होगा। निविदा में शामिल होने वाली कंपनियों का औसत वार्षिक कारोबार कम से कम एक करोड़ रुपये होना चाहिए।

इसके अलावा उन्हें समान परियोजनाओं का अनुभव दिखाना होगा। चयनित कंपनी को तीन प्रतिशत की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी और प्रत्येक स्थल के लिए पांच लाख रुपये की बोली सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चुनी गई तकनीकें वास्तविक परिस्थितियों में प्रदूषण कितना कम कर पाती हैं और उनका असर कितने समय तक बना रहता है। स्वतंत्र निगरानी और परिणाम के आधार पर भुगतान की व्यवस्था से सरकार को कंपनियों के प्रदर्शन का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

 

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