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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेताओं को हाईकोर्ट की फटकार

आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों और जमानत बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों करीब एक सप्ताह से हिरासत में बताए गए हैं। उनकी जमानत की प्रक्रिया में भी कई बाधाएं सामने आईं। मामले में जमानतदारों की पहचान और उनके दस्तावेजों को लेकर सवाल उठने के बाद दोनों को राहत नहीं मिल सकी।

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Gauravshali Bharat News
  • October 21, 2026 1:52 pm IST, Published 1 hour ago

नयी दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी तथा जमानत को लेकर कानूनी मामला लगातार चर्चा में है। दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने जमानत की शर्तों और प्रतिबंधों के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश को लेकर दोनों से सवाल किए। अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया हो, तो उसका उल्लंघन गंभीर मामला है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने दोनों नेताओं के आचरण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रतिबंध के बावजूद वे जंतर-मंतर क्यों पहुंचे थे और उनके संगठन का उद्देश्य क्या है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है। यदि प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हैं, तो दूसरे लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है और हालात बिगड़ने की आशंका रहती है।

अदालत ने विदेशों में हुए कुछ विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जगह छात्र आंदोलनों के दौरान स्थिति हिंसा, आगजनी और इमारतों को नुकसान पहुंचाने तक पहुंच गई थी। न्यायाधीश ने इस संदर्भ में आगाह किया कि किसी प्रदर्शन की शुरुआत भले ही शांतिपूर्ण मांगों के साथ हो, लेकिन यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अदालत की टिप्पणियां प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित शर्तों का पालन करने की अहमियत पर केंद्रित रहीं।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों और जमानत बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों करीब एक सप्ताह से हिरासत में बताए गए हैं। उनकी जमानत की प्रक्रिया में भी कई बाधाएं सामने आईं। मामले में जमानतदारों की पहचान और उनके दस्तावेजों को लेकर सवाल उठने के बाद दोनों को राहत नहीं मिल सकी।

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जमानत प्रक्रिया में जिन दो लोगों को जमानतदार बनाया गया था, उनके खिलाफ उत्तम नगर और अन्य पुलिस थानों में मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इस पर अदालत ने वकीलों से स्पष्टीकरण मांगा। बताया गया कि वकीलों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए अदालत से माफी मांगी। इसके बाद अगली प्रक्रिया में भी जमानतदारों के दस्तावेजों और पहचान को लेकर समस्याएं सामने आईं।

अदालती कार्यवाही के दौरान आधार कार्ड, बांड पर लगी तस्वीरों और संपर्क संबंधी विवरणों की जांच किए जाने की बात भी सामने आई। मजिस्ट्रेट ने जमानतदारों को अलग-अलग बुलाकर उनसे पूछताछ की। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं को जानने की अवधि और उनके परिवार तथा निजी पृष्ठभूमि से जुड़े सवालों के जवाबों में विरोधाभास पाया गया। कथित तौर पर जमानतदारों ने यह भी कहा कि वे नेताओं के दबाव में जमानत देने के लिए तैयार हुए थे। इन परिस्थितियों के कारण जमानत प्रक्रिया में देरी हुई।

बताया गया है कि दोनों नेताओं को आगे की कार्यवाही के लिए मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में भी पेश किया जाना था। यदि निर्धारित शर्तों के मुताबिक सही जमानतदार और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, तो उन्हें हिरासत में रहना पड़ सकता है। हालांकि, उनकी जमानत और हिरासत को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। इस मामले में एक ओर प्रदर्शन के दौरान तय नियमों और जमानत की शर्तों के पालन का सवाल है, तो दूसरी ओर आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत पाने का अधिकार भी है। अदालत में आगे होने वाली सुनवाई से स्पष्ट होगा कि दोनों नेताओं को जमानत मिलती है या उनकी हिरासत जारी रहती है।

 

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