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दिल्ली की हवा बिगड़ी, सरकार ने लागू किया GRAP-1, वाहनों पर बढ़ेगी सख्ती

दिल्ली सरकार स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने के लिए आईआईटी मद्रास के साथ तकनीकी सहयोग भी कर रही है। मंत्री ने बताया कि ‘वायु रक्षक’ नाम से जुड़े कर्मचारी और कार्यकर्ता वार्ड स्तर पर प्रदूषण के संभावित स्रोतों की जानकारी जुटा रहे हैं तथा नियमों के उल्लंघन की सूचना अधिकारियों को दे रहे हैं। पेड़ों की स्थिति पर नजर रखने के लिए पौधों को जियो-टैग करने की पहल भी की गई है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 21, 2026 4:45 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्ली: दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का जोर धूल, वाहनों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण फैलाने वाली अन्य गतिविधियों पर नियंत्रण करने के साथ आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर है।

GRAP दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता खराब होने पर लागू की जाने वाली चरणबद्ध व्यवस्था है। इसके तहत प्रदूषण के स्तर के अनुसार अलग-अलग पाबंदियां और नियंत्रण संबंधी उपाय लागू किए जाते हैं। पहले चरण में खराब वायु गुणवत्ता से निपटने के लिए प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की निगरानी बढ़ाई जाती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI के 201 से 300 के बीच पहुंचने पर GRAP का पहला चरण लागू किया जाता है। इसके बाद प्रदूषण बढ़ने पर दूसरे, तीसरे और चौथे चरण के तहत अधिक सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

मंत्री सिरसा के अनुसार, GRAP-1 लागू होने के बाद होटल, रेस्तरां और खुले में भोजन बेचने वाली दुकानों पर तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर सख्ती की जाएगी। इनके स्थान पर गैस, बिजली या स्वच्छ ईंधन से चलने वाले उपकरणों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, सामान्य बिजली आपूर्ति के लिए डीजल जनरेटर चलाने पर रोक रहेगी। हालांकि, जरूरी सेवाओं और आपात परिस्थितियों में इनके इस्तेमाल की अनुमति नियमों के अनुसार दी जा सकती है।

सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी कई कदमों की घोषणा की है। सिरसा ने बताया कि एक नवंबर से वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना चलने वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने की व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसके साथ ही मेट्रो पार्किंग को छोड़कर दिल्ली में पार्किंग शुल्क दोगुना करने की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि पार्किंग महंगी होने से निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

मंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार और नगर निगम के कार्यालयों के कामकाजी समय में अंतर रखने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, यातायात का दबाव घटाने के लिए वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना है। इन उपायों का उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की संख्या और उनसे होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।

निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। खुले में निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि धूल कम करने के लिए राजधानी में 608 एंटी-स्मॉग गन और 1,150 मिस्ट स्प्रे यूनिट लगाई गई हैं। निर्माण स्थलों पर प्रदूषण संबंधी नियमों के पालन की निगरानी के लिए एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी बनाया गया है। इसके अलावा, वाहनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने के लिए आईआईटी मद्रास के साथ तकनीकी सहयोग भी कर रही है। मंत्री ने बताया कि ‘वायु रक्षक’ नाम से जुड़े कर्मचारी और कार्यकर्ता वार्ड स्तर पर प्रदूषण के संभावित स्रोतों की जानकारी जुटा रहे हैं तथा नियमों के उल्लंघन की सूचना अधिकारियों को दे रहे हैं। पेड़ों की स्थिति पर नजर रखने के लिए पौधों को जियो-टैग करने की पहल भी की गई है।

सरकार कृत्रिम बारिश की संभावना पर भी काम कर रही है। इसके लिए आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि अनुकूल परिस्थितियों में क्लाउड सीडिंग के जरिए बारिश कराने से प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया का असर मौसम और अन्य वैज्ञानिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। मंत्री सिरसा ने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे खुले में कचरा या अन्य सामग्री न जलाएं, कारपूलिंग अपनाएं और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। राजधानी की हवा को साफ बनाने के लिए नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है।

 

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