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OPS पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, नियमित होने से पहले की सेवा भी गिनी जाएगी

पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन संबंधी लाभ कर्मचारी की पात्रता और लागू सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं। ऐसे में नियमित नियुक्ति से पहले की सेवा को अर्हकारी अवधि में जोड़ने का महत्व बढ़ जाता है। इससे संबंधित कर्मचारियों की पेंशन की गणना पर असर पड़ सकता है और कुछ मामलों में उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।

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  • October 21, 2026 5:00 pm IST, Published 39 minutes ago

चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अंशकालिक, दैनिक वेतन और तदर्थ आधार पर काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत भरी खबर आई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नियमित नियुक्ति से पहले की गई निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ पाने का रास्ता मजबूत हुआ है।

यह निर्णय जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने जगदीश और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि सरकारी स्कूलों में नियमित कर्मचारी बनने से पहले अंशकालिक, दैनिक वेतन या तदर्थ आधार पर दी गई उनकी सेवाओं को भी पेंशन की गणना में जोड़ा जाए। उनका पक्ष था कि नियमित होने से पहले भी उन्होंने सरकारी संस्थानों में काम किया और अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इसलिए उस अवधि को पेंशन संबंधी लाभ तय करते समय नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मामले में मुख्य सवाल यह था कि क्या किसी कर्मचारी की नियमित नियुक्ति से पहले की गई सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी अवधि माना जा सकता है। अदालत के फैसले के अनुसार, यदि कर्मचारी ने नियमित होने से पहले अंशकालिक, दैनिक वेतन या तदर्थ आधार पर निरंतर सेवा दी है, तो उस अवधि को पेंशन की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। इस व्याख्या से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी नौकरी की शुरुआत अस्थायी या गैर-नियमित व्यवस्था के तहत हुई थी और बाद में उन्हें नियमित किया गया।

सरकारी विभागों में कई कर्मचारी शुरुआत में दैनिक वेतन, अंशकालिक या तदर्थ आधार पर नियुक्त किए जाते हैं। बाद में नियमित नियुक्ति मिलने पर उनकी सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति के लाभों की गणना को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। खासकर पेंशन के मामले में नियमित नियुक्ति से पहले की अवधि को शामिल करने या बाहर रखने का सवाल कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस फैसले से ऐसे मामलों में सेवा की निरंतरता और पेंशन संबंधी पात्रता पर चर्चा को नई दिशा मिल सकती है।

पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन संबंधी लाभ कर्मचारी की पात्रता और लागू सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं। ऐसे में नियमित नियुक्ति से पहले की सेवा को अर्हकारी अवधि में जोड़ने का महत्व बढ़ जाता है। इससे संबंधित कर्मचारियों की पेंशन की गणना पर असर पड़ सकता है और कुछ मामलों में उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक लाभ उसकी नियुक्ति की परिस्थितियों, सेवा रिकॉर्ड और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

इस फैसले को हरियाणा के उन सरकारी स्कूल कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था के तहत काम किया और बाद में नियमित हुए। ऐसे कर्मचारियों के लिए नियमित होने से पहले की सेवा केवल कार्यकाल का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके पेंशन अधिकारों से जुड़ा विषय भी है। अदालत के निर्णय से उनकी उस मांग को समर्थन मिला है कि सरकारी संस्थानों में दी गई निरंतर सेवा की गणना पेंशन संबंधी लाभ तय करते समय की जानी चाहिए।

इस मामले का व्यापक असर उन कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जो इसी तरह की सेवा व्यवस्था से नियमित नियुक्ति तक पहुंचे हैं। हालांकि, फैसले का लाभ किस सीमा तक और किन कर्मचारियों को मिलेगा, यह संबंधित सेवा नियमों, अदालत के आदेश के दायरे और प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर तय होगा।

कुल मिलाकर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पहले अस्थायी आधार पर काम कर चुके नियमित कर्मचारियों के पेंशन अधिकारों के लिहाज से अहम है। अदालत ने नियमित नियुक्ति से पहले की निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल करने का निर्देश देकर कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को राहत दी है।

 

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