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चीन सीमा पर तनाव को लेकर कांग्रेस का हमला, पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों में एक अहम मुद्दा रहा है। 2017 में डोकलाम क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। इस गतिरोध के कारण कई सप्ताह तक तनाव बना रहा था। उस समय सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत हुई थी। डोकलाम का मुद्दा...

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  • October 23, 2026 10:38 am IST, Published 1 hour ago

भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनने संबंधी बयान के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर निशाना साधा है। सीमा पर तैनात भारतीय जवानों की भूमिका और चीन के साथ संबंधों को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती दिखाई दे रही है।

आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने एक कार्यक्रम के दौरान अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कई बार दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी है और ऐसी परिस्थितियां अब भी जारी हैं। उन्होंने सीमा पर तैनात भारतीय जवानों के काम की सराहना करते हुए कहा कि शौर्य कमांडो टीमों ने चुनौतीपूर्ण हालात में अच्छा प्रदर्शन किया है।

कपूर ने आईटीबीपी की भूमिका और बदलती जरूरतों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस बल की शुरुआत माउंटेन गुरिल्ला फोर्स के रूप में हुई थी। समय के साथ इसकी जिम्मेदारियों में बदलाव आया और इसने चीन से लगती सीमा की सुरक्षा के लिए पारंपरिक बल के रूप में काम किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में गुरिल्ला युद्ध की जरूरत भले ही पहले जैसी न हो, लेकिन ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम करने वाली विशेष क्षमता विकसित करना जरूरी है। उनके मुताबिक, हाई ऑल्टिट्यूड फोर्स के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना सुरक्षा बल के लिए महत्वपूर्ण है।

आईटीबीपी प्रमुख के इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को विश्वगुरु बताने वाली सरकार चीन के मामले में नरम रुख अपना रही है। जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में कहा कि आईटीबीपी के डीजी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं के दौरान भारतीय जवानों के प्रदर्शन की तारीफ की है, जो उचित है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आने पर सवाल उठाया। कांग्रेस नेता ने इसे हैरान करने वाला बताते हुए केंद्र सरकार से चीन के साथ सीमा पर बनी स्थिति को लेकर जवाबदेही की मांग की।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों में एक अहम मुद्दा रहा है। 2017 में डोकलाम क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। इस गतिरोध के कारण कई सप्ताह तक तनाव बना रहा था। उस समय सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत हुई थी। डोकलाम का मुद्दा भारतीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना और विपक्ष ने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए थे।

अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर आमने-सामने की स्थिति को लेकर आईटीबीपी प्रमुख के बयान ने एक बार फिर चीन के साथ सीमा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। जहां सुरक्षा बल दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैनाती और क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रही है। फिलहाल, इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सीमा पर वास्तविक स्थिति और घटनाओं के विस्तृत आधिकारिक ब्योरे पर ध्यान बना हुआ है।

 

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