MLC चुनाव में EVM क्यों नहीं? बैलेट पेपर से वोटिंग की बड़ी वजह

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से लेकर विधान परिषद की चुनावी प्रक्रिया तक, जानिए MLC चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की वजह, प्राथमिकता आधारित मतदान का गणित और आम चुनाव से इसके प्रमुख अंतर।

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  • October 23, 2026 9:00 pm IST, Published 1 hour ago

MLC चुनाव : भारत में चुनावों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल आम तौर पर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में देखने को मिलता है। लेकिन विधान परिषद यानी MLC के कुछ चुनावों में मतदाताओं को बैलेट पेपर के माध्यम से वोट डालना होता है। इसकी वजह केवल परंपरा नहीं, बल्कि चुनाव की अलग व्यवस्था और मतदान की विशेष पद्धति भी है।

MLC का पूरा नाम Member of Legislative Council है, जिसे हिंदी में विधान परिषद का सदस्य कहा जाता है। विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। इसकी संरचना और सदस्यों के निर्वाचन की प्रक्रिया विधानसभा से अलग होती है। जहां विधानसभा चुनावों में सामान्यतः मतदाता एक उम्मीदवार को वोट देता है, वहीं विधान परिषद की कुछ सीटों के चुनाव में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में प्राथमिकता देता है।

यही अंतर MLC चुनाव की प्रक्रिया को विशेष बनाता है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता केवल किसी एक उम्मीदवार के सामने निशान लगाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी पसंद व्यक्त करता है। इस तरह के मतदान में बैलेट पेपर और मतगणना की प्रक्रिया की अहम भूमिका होती है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि विधान परिषद की सभी सीटों पर चुनाव एक ही तरीके से नहीं होते। कुछ सदस्य स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं, कुछ शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से आते हैं, जबकि कुछ का निर्वाचन विधानसभा के सदस्य करते हैं। इसके अतिरिक्त राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्यों की भी व्यवस्था है।

देश के केवल चार राज्यों में है विधान परिषद

भारत में विधान परिषद की व्यवस्था हर राज्य में नहीं है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक उन राज्यों में शामिल हैं जहां विधान परिषद मौजूद है। इन राज्यों में विधान परिषद के गठन और सदस्यों के निर्वाचन की संवैधानिक व्यवस्था लागू होती है।

विधान परिषद के चुनाव में मतदाता कौन होगा, यह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र पर निर्भर करता है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित पात्रता वाले शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत पात्र स्नातक मतदाता होते हैं। स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों में संबंधित निकायों के पात्र निर्वाचित प्रतिनिधि मतदान करते हैं। कुछ सदस्यों का चुनाव विधायक भी करते हैं।

इसलिए MLC चुनाव में मतदान की प्रक्रिया को समझने के लिए यह देखना आवश्यक है कि चुनाव किस सीट और किस निर्वाचन क्षेत्र के लिए हो रहा है।

EVM के बजाय बैलेट पेपर इस्तेमाल करने की मुख्य वजह

MLC चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल का प्रमुख कारण मतदान की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है। विधान परिषद के निर्वाचित सदस्यों के चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत पद्धति (Single Transferable Vote) का प्रावधान है। इस प्रणाली में उम्मीदवारों के पक्ष में प्राथमिकताएं दर्ज की जाती हैं और मतगणना संबंधित नियमों के अनुसार की जाती है।

बैलेट पेपर पर मतदाता अपनी पहली पसंद के उम्मीदवार के सामने अंक 1 लिखता है। यदि वह चाहे तो अन्य उम्मीदवारों के सामने अपनी पसंद के अनुसार अंक 2, 3 और आगे के अंक भी लिख सकता है। प्राथमिकताएं शब्दों में लिखने के बजाय निर्धारित अंकों से दर्ज करनी होती हैं।

इसका उद्देश्य केवल किसी एक उम्मीदवार को वोट देना नहीं, बल्कि मतदाता की प्राथमिकताओं को चुनावी नियमों के अनुसार दर्ज करना है। हालांकि, मतदाता को सभी उम्मीदवारों के सामने प्राथमिकता दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता; उसे निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।

कैसे काम करती है प्राथमिकता आधारित वोटिंग?

MLC चुनाव की मतदान प्रक्रिया को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी निर्वाचन क्षेत्र में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदाता अपनी पसंद के अनुसार पहले उम्मीदवार के सामने 1, दूसरे के सामने 2 और तीसरे के सामने 3 लिख सकता है।

यदि मतदाता केवल अपनी पहली पसंद दर्ज करना चाहता है, तो वह नियमों के अनुसार ऐसा कर सकता है। अन्य प्राथमिकताएं दर्ज करना उसकी इच्छा पर निर्भर करता है। लेकिन गलत तरीके से अंक लिखने, एक से अधिक उम्मीदवारों के सामने पहली प्राथमिकता दर्ज करने या निर्धारित निर्देशों का उल्लंघन करने से मतपत्र अमान्य हो सकता है।

इसलिए मतदान से पहले निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों को ध्यान से समझना जरूरी है। मतदाता को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बैलेट पेपर पर किसी ऐसी तरह का निशान न लगाया जाए जिससे मत की गोपनीयता या वैधता प्रभावित हो।

प्राथमिकता आधारित मतगणना में किसी उम्मीदवार की स्थिति केवल सामान्य वोटों की संख्या देखकर तय नहीं होती। चुनाव के नियमों के अनुसार आवश्यक मतों का कोटा, पहली प्राथमिकताओं की गिनती और जरूरत पड़ने पर मतों का स्थानांतरण परिणाम को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि इस प्रक्रिया में सावधानी और स्पष्ट निर्देश महत्वपूर्ण होते हैं।

क्या EVM से MLC चुनाव कराना संभव नहीं है?

यह कहना सही नहीं होगा कि EVM से MLC चुनाव कराना तकनीकी रूप से बिल्कुल असंभव है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग निर्वाचन आयोग के निर्धारित कानूनी प्रावधानों और निर्देशों के अनुसार किया जाता है। आयोग की FAQ में भी बताया गया है कि EVM का इस्तेमाल किन व्यवस्थाओं के तहत किया जाता है।

लेकिन किसी चुनाव में EVM का उपयोग किया जाएगा या बैलेट पेपर का, यह केवल तकनीकी सुविधा के आधार पर तय नहीं होता। इसके लिए संबंधित चुनाव की कानूनी व्यवस्था, मतदान की पद्धति और निर्वाचन आयोग के लागू निर्देश महत्वपूर्ण होते हैं।

MLC चुनाव में प्राथमिकता आधारित मतदान और मतगणना की विशेष व्यवस्था होने के कारण बैलेट पेपर का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस व्यवस्था को केवल EVM पर रोक के रूप में देखना अधूरा होगा। इसके पीछे चुनाव प्रणाली की प्रकृति और निर्धारित नियमों को समझना जरूरी है।

बैलेट पेपर से मतदान में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

बैलेट पेपर से मतदान करते समय मतदाताओं को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।

* निर्देश पढ़ें: मतदान शुरू करने से पहले निर्वाचन अधिकारी द्वारा बताए गए नियमों को समझें।

* पहली पसंद स्पष्ट करें: पहली प्राथमिकता के लिए निर्धारित तरीके से अंक 1 दर्ज करें।

* अन्य प्राथमिकताएं सावधानी से दें: अतिरिक्त प्राथमिकताएं दर्ज करते समय अंकों का क्रम सही रखें।

* अनावश्यक निशान न लगाएं: मतपत्र पर ऐसे निशान या लिखावट से बचें जो मत को अमान्य कर सकते हैं।

* गोपनीयता बनाए रखें: मतदान के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को अपना मत दिखाने या बताने की आवश्यकता नहीं है।

* अधिकृत जानकारी पर भरोसा करें: किसी संदेह की स्थिति में मतदान केंद्र पर तैनात अधिकृत कर्मचारी से जानकारी लें।

इन सावधानियों से मतदाता अपनी पसंद सही तरीके से दर्ज कर सकता है और मतपत्र के अमान्य होने की आशंका कम कर सकता है।

MLC चुनाव और विधानसभा चुनाव में क्या है अंतर?

विधानसभा चुनाव में मतदाता सामान्यतः EVM पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के चुनाव चिह्न वाला बटन दबाता है। वहीं विधान परिषद के चुनाव में मतदाता वर्ग और चुनाव के प्रकार के अनुसार मतदान करता है। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बैलेट पेपर पर प्राथमिकताएं दर्ज करनी होती हैं।

विधान परिषद की संरचना भी विधानसभा से अलग है। इसके सदस्यों का निर्वाचन अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और निर्वाचक मंडलों के माध्यम से होता है। कुछ सदस्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं, जबकि अन्य का निर्वाचन शिक्षक, स्नातक और स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों से होता है। इसके अलावा राज्यपाल द्वारा मनोनयन की व्यवस्था भी है।

इस अंतर को समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दोनों चुनावों की मतदान प्रक्रिया और मतगणना के नियम एक जैसे नहीं हैं।

निष्कर्ष: EVM पर रोक से ज्यादा महत्वपूर्ण है चुनावी नियम

MLC चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को समझने के लिए चुनाव की कानूनी प्रक्रिया और प्राथमिकता आधारित मतदान व्यवस्था को जानना जरूरी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की व्यवस्था है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इन चारों राज्यों में हर समय MLC चुनाव हो रहे हैं।

बैलेट पेपर पर प्राथमिकताएं दर्ज करने की व्यवस्था विधान परिषद के चुनावों की विशिष्ट प्रकृति से जुड़ी है। मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे मतदान के नियमों को समझें और अपने मत का सही तरीके से इस्तेमाल करें।

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