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मन की बात के 12 साल पूरे, पीएम मोदी बोले- देशवासियों का स्नेह अमूल्य पूंजी

‘मन की बात’ की शुरुआत के 12 वर्ष पूरे होने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को निरंतर संवाद और जनभागीदारी से जुड़ा अनुभव बताया।

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Gauravshali Bharat News
  • October 25, 2026 11:30 am IST, Published 2 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में देशवासियों के साथ अपने लंबे जुड़ाव और कार्यक्रम के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की शुरुआत विजयादशमी के पावन अवसर पर हुई थी और तब से यह यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने श्रोताओं को इस सफर का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि उनके लिए ‘मन की बात’ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश के आम नागरिकों के प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना को सामने लाने का विशेष अवसर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘मन की बात’ के साथ उनका जुड़ाव देश के लोगों के भरोसे और स्नेह से मजबूत हुआ है। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें समाज के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के अनुभवों, विचारों और उपलब्धियों को जानने का अवसर मिलता है। उन्होंने श्रोताओं को इस यात्रा का सहयात्री और मार्गदर्शक बताते हुए उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामान्य नागरिक अपने काम, मेहनत और दृढ़ संकल्प से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे लोगों की कहानियों को सामने लाना उनके लिए गर्व का विषय रहा है। उनके अनुसार, देश की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों के भीतर छिपी है, जो बिना किसी विशेष प्रचार के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं। उन्होंने ‘मन की बात’ को देश की लोकशक्ति से जुड़ने का एक माध्यम बताया।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें देश के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों की पहल और उनके अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है। समाज में सेवा, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करने वाले नागरिकों की उपलब्धियां इस कार्यक्रम के केंद्र में रही हैं। मोदी ने श्रोताओं के स्नेह और आत्मीयता को अपनी अमूल्य पूंजी बताते हुए कहा कि लोगों के साथ बना यह रिश्ता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम की निरंतरता में देशवासियों की भागीदारी और उनके सुझावों की अहम भूमिका रही है।

आम लोगों की बातें सुनना और उनके प्रयासों को देश के सामने प्रस्तुत करना इस संवाद की प्रमुख विशेषता रही है। ‘मन की बात’ की यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में समाज की ताकत उसके लोगों की सक्रिय भागीदारी से सामने आती है। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले नागरिक अपने स्तर पर कई ऐसे प्रयास करते हैं, जिनसे दूसरों को प्रेरणा मिलती है। इन प्रयासों को पहचान देना और व्यापक समाज तक पहुंचाना सामूहिक योगदान के महत्व को उजागर करता है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में देशवासियों के साथ भावनात्मक जुड़ाव का पहलू भी प्रमुख रहा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें देश के परिवारों से जुड़ने का अवसर मिलता है। श्रोताओं की आत्मीयता और विश्वास को उन्होंने अपने लिए विशेष महत्व का बताया। उनके वक्तव्य से यह संदेश सामने आया कि किसी भी सार्वजनिक संवाद की मजबूती लोगों की भागीदारी और आपसी विश्वास पर निर्भर करती है।‘मन की बात’ की शुरुआत के 12 वर्ष पूरे होने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को निरंतर संवाद और जनभागीदारी से जुड़ा अनुभव बताया।

उन्होंने देश के आम लोगों की मेहनत, पराक्रम, प्रतिबद्धता और सेवा भावना को सम्मान देने की बात कही। कार्यक्रम के जरिए ऐसे नागरिकों के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया जाता रहा है, जिनके कार्य समाज और देश के लिए उपयोगी साबित होते हैं। प्रधानमंत्री के इस संबोधन में नागरिकों के योगदान, सामाजिक जिम्मेदारी और जनसंवाद के महत्व पर जोर दिखाई दिया। उन्होंने श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ‘मन की बात’ को देशवासियों के साथ साझा अनुभवों और प्रेरक प्रयासों को जोड़ने वाला मंच बताया। कार्यक्रम की इस यात्रा के माध्यम से आम लोगों की उपलब्धियों और उनकी सकारात्मक पहल को पहचान देने का संदेश भी सामने आया।


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