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मतगणना से पहले IAS अभय सिंह की जिम्मेदारी बदली, प्रकाश बिंदु को मिली कमान

अब 2026 में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाए जाने के कारण उनका नाम फिर चर्चा में आया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने 23 अक्टूबर को चुनाव आयोग को ईमेल भेजकर अभय सिंह की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने पुराने खनन मामले का हवाला देते हुए चुनाव की...

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  • October 27, 2026 11:00 am IST, Published 2 hours ago

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारी अभय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से उन्हें हटाया जाना है। निर्वाचन आयोग ने 26 अक्टूबर 2026 को यह फैसला लिया, जबकि इस सीट पर मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित थी। अभय सिंह की जगह 2009 बैच के IAS अधिकारी प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी सौंपी गई। यह बदलाव भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में अभय सिंह से जुड़े 2019 के कथित अवैध खनन मामले का हवाला देते हुए उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे।

अभय सिंह 2007 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर में विभिन्न जिलों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, वह फतेहपुर, रायबरेली, बहराइच और बुलंदशहर जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर रह चुके हैं। जुलाई 2019 में बुलंदशहर के जिलाधिकारी रहते हुए उनका नाम अवैध खनन से जुड़े एक मामले में सामने आया था।

इस मामले की जड़ें उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 से 2016 के बीच खनन पट्टों के आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं में थीं। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि कुछ खनन पट्टे नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के विपरीत दिए गए। उस समय अभय सिंह फतेहपुर के जिलाधिकारी थे। जुलाई 2019 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके आवास पर तलाशी ली थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी के दौरान वहां से लगभग 47 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामले से जुड़े आरोपों पर उनसे पूछताछ की थी। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी मामले में नाम आने, जांच का सामना करने या प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ अपने आप में अपराध साबित होना नहीं है। अभय सिंह के खिलाफ इस मामले की वर्तमान जांच स्थिति और किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती। इसलिए पुराने मामले का उल्लेख आरोपों और जांच के संदर्भ में ही किया जाना चाहिए।

अब 2026 में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाए जाने के कारण उनका नाम फिर चर्चा में आया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने 23 अक्टूबर को चुनाव आयोग को ईमेल भेजकर अभय सिंह की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने पुराने खनन मामले का हवाला देते हुए चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए और उन्हें पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटाने की मांग की थी।

इसके बाद निर्वाचन आयोग ने अभय सिंह को इस निर्वाचन क्षेत्र में पर्यवेक्षक की ड्यूटी से मुक्त कर दिया और उन्हें रिजर्व में रखा। उनकी जगह IAS अधिकारी प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी सौंपी गई। यह फैसला मतगणना से ठीक पहले आया, जिसके चलते प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि अधिकारी को हटाने का फैसला पुराने मामले में दोष सिद्ध होने के कारण लिया गया। सामने आई जानकारी के अनुसार, तत्काल कार्रवाई शिकायत और नियुक्ति पर उठाई गई आपत्तियों के बाद हुई।

 

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