लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं। कभी सपा में रहे मौर्य ने मंगलवार को आरोप लगाया कि अखिलेश यादव भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और एजेंडे की नकल कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन क्यों नहीं करती। मौर्य के इन बयानों से प्रदेश की सियासत में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा की नकल करने से समाजवादी पार्टी को राजनीतिक सफलता नहीं मिलेगी, बल्कि इससे भाजपा को ही फायदा पहुंच सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व और सनातन से जुड़े मुद्दों पर सपा का रुख भाजपा की राजनीति को मजबूती देता है। मौर्य ने कहा कि जिस पार्टी के पास 37 सांसद और 110 विधायक हैं, उससे भाजपा सरकार के खिलाफ अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या भाजपा और सपा के बीच कोई राजनीतिक समझ है। हालांकि, उनके इस आरोप के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
मौर्य ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाते हुए देशभर में बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ एक नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली में शामिल होंगे। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से उठाई जा रही चिंताओं के बीच मौर्य ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को दोहराया।
राजधानी लखनऊ में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या के मामले को लेकर भी मौर्य ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजधानी में इस तरह की वारदात होना प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक, लखनऊ में मुख्यमंत्री और शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटना होना चिंता का विषय है।
मौर्य ने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस की ओर से समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि घटना के बाद इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया, लेकिन उनके अनुसार कार्रवाई पहले ही होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की पीड़ित परिवार की मांग का समर्थन भी किया। हालांकि, किसी भी संपत्ति पर कार्रवाई का फैसला संबंधित कानूनों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अपने दावों के अनुरूप परिणाम नहीं दे पा रही है। मौर्य ने कहा कि गंभीर अपराधों और अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ होने वाली घटनाओं के बावजूद सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का उल्लेख करती रहती है। उनके अनुसार, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल घोषणाओं के बजाय ठोस कार्रवाई जरूरी है।
मौर्य के बयान ऐसे समय आए हैं, जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की रणनीति और भाजपा सरकार के खिलाफ उनके आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। उन्होंने एक ओर अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उनके आरोपों पर समाजवादी पार्टी और भाजपा की प्रतिक्रिया से राजनीतिक बहस आगे बढ़ सकती है। फिलहाल, मौर्य के बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।