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पत्रकार, राजनेता और उद्योगपति आरके सिन्हा का निधन

उनके निधन से बिहार ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने पत्रकारिता की कलम से शुरुआत की, राजनीति में अपनी पहचान बनाई और उद्योग जगत में एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान खड़ा किया

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Gauravshali Bharat News
  • October 30, 2026 1:53 pm IST, Published 1 hour ago

बिहार की राजनीति, पत्रकारिता और उद्योग जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा का निधन एक ऐसे व्यक्तित्व का अवसान है, जिसने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर अपने परिश्रम, दूरदृष्टि और उद्यमशीलता के बल पर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित की। एसआईएस (SIS) ग्रुप के संस्थापक चेयरमैन और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सिन्हा ने शुक्रवार को नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से बिहार सहित देश के राजनीतिक, सामाजिक, पत्रकारिता और कारोबारी जगत में शोक की लहर फैल गई है।

आरके सिन्हा का व्यक्तित्व कई आयामों में विकसित हुआ था। वे पत्रकार रहे, राजनीतिक कार्यकर्ता रहे, उद्यमी बने, सामाजिक सरोकारों से जुड़े और साहित्य तथा वैचारिक पत्रकारिता के प्रति भी अपनी रुचि बनाए रखी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति की शुरुआत भले ही साधारण परिस्थितियों में हुई हो, लेकिन संकल्प और निरंतर परिश्रम उसे असाधारण उपलब्धियों तक पहुंचा सकते हैं।

आरके सिन्हा ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। पटना के चर्चित समाचार पत्रों ‘प्रदीप’ और ‘द सर्चलाइट’ में उन्होंने पत्रकार के रूप में काम किया। उस दौर में बिहार की राजनीति उथल-पुथल से गुजर रही थी। भ्रष्टाचार, छात्र आंदोलन और सत्ता के खिलाफ उठती आवाजों के बीच उनकी पत्रकारिता ने उन्हें एक निर्भीक और सक्रिय पत्रकार के रूप में पहचान दिलाई। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने भी उनके राजनीतिक और वैचारिक जीवन को प्रभावित किया। उन्होंने 1970 के दशक के छात्र आंदोलन और उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को करीब से देखा और लिखा। उनकी पुस्तक ‘जनांदोलन’ इसी दौर के अनुभवों और घटनाक्रम को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है।

पत्रकारिता के अनुभवों ने उनके भीतर संगठन और संस्थान निर्माण की क्षमता को भी विकसित किया। वर्ष 1974 में पटना से एसआईएस की यात्रा शुरू हुई। दो लोगों की छोटी-सी शुरुआत आगे चलकर एक बड़े कारोबारी समूह में बदल गई। सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में उन्होंने एक ऐसा मॉडल विकसित किया, जिसमें प्रशिक्षित मानव संसाधन, अनुशासन, पेशेवर दक्षता और तकनीक को विशेष महत्व दिया गया। सेवानिवृत्त सैनिकों और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने की उनकी पहल ने निजी सुरक्षा सेवा क्षेत्र को एक संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने में योगदान दिया।

आज SIS Group Enterprises केवल एक सुरक्षा सेवा कंपनी नहीं, बल्कि सिक्योरिटी सॉल्यूशंस, फैसिलिटी मैनेजमेंट और कैश लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में काम करने वाला एक बड़ा भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह है। भारत से आगे बढ़कर इस समूह ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में भी अपनी मजबूत व्यावसायिक उपस्थिति बनाई। ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में समूह की महत्वपूर्ण बाजार हिस्सेदारी है। न्यूजीलैंड और सिंगापुर में भी इसकी कंपनियां विभिन्न सुरक्षा और प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। लाखों कर्मचारियों, हजारों ग्राहक स्थलों और व्यापक कारोबारी नेटवर्क के साथ SIS ने भारतीय उद्यमशीलता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिष्ठित करने का काम किया है। एक छोटे शहर से शुरू हुआ यह सफर इस बात का उदाहरण है कि भारतीय प्रतिभा और प्रबंधन क्षमता वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती है।

उद्योग जगत में उल्लेखनीय सफलता के बावजूद आरके सिन्हा ने पत्रकारिता और वैचारिक लेखन से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा। दिल्ली से प्रकाशित हिंदी की पाक्षिक पत्रिका ‘यथावत’ के साथ उनका जुड़ाव इसी का प्रमाण था। वे इस पत्रिका के चेयरमैन थे। समसामयिक राजनीति, समाज, संस्कृति और राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर विमर्श को स्थान देने वाली इस पत्रिका के माध्यम से वे वैचारिक पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाने से जुड़े रहे। उनके लेखन में पत्रकारिता के शुरुआती दिनों का अनुभव और राजनीतिक घटनाओं को देखने-समझने की दृष्टि दिखाई देती थी।

हिन्दुस्थान समाचार से उनका जुड़ाव भी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा। इस बहुभाषी समाचार एजेंसी के प्रति उनका विशेष भावनात्मक और वैचारिक लगाव था। अपने पत्रकारिता जीवन के शुरुआती दौर से इस संस्थान से संबंध का उल्लेख उन्होंने स्वयं किया था। वर्ष 2016 में उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार के अध्यक्ष का दायित्व संभाला और इसके पुनर्गठन तथा विस्तार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका प्रयास था कि भारतीय भाषाओं में समाचार सेवा देने वाली यह एजेंसी बदलते मीडिया परिदृश्य में अपनी पहचान और पहुंच मजबूत करे। इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी यात्रा केवल एक रिपोर्टर के रूप में शुरू होकर संस्थान निर्माण और नेतृत्व तक पहुंची।

राजनीति में भी आरके सिन्हा की अपनी विशिष्ट पहचान थी। भाजपा के शुरुआती दौर से संगठन के साथ जुड़े रहने के कारण बिहार में उनका विशेष सम्मान था। वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने जाते थे और संगठन के विभिन्न चरणों के साक्षी रहे। वर्ष 2014 में बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने संसद में भी अपनी भूमिका निभाई। राजनीति उनके लिए केवल सत्ता और पद का माध्यम नहीं, बल्कि संगठनात्मक जुड़ाव और सार्वजनिक जीवन का विस्तार थी।

उनके निधन से बिहार ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने पत्रकारिता की कलम से शुरुआत की, राजनीति में अपनी पहचान बनाई और उद्योग जगत में एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान खड़ा किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए उद्यमशीलता, आत्मविश्वास, जोखिम उठाने की क्षमता और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा बना रहेगा। पटना की गलियों से शुरू होकर दुनिया के कई देशों तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा लंबे समय तक याद की जाएगी। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली से पटना लाया जाएगा। पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। अंतिम संस्कार की तिथि और समय की आधिकारिक सूचना की प्रतीक्षा है।

 

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