डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी की व्यापक समीक्षा के तहत इटली और स्पेन से अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर सकता है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और नाटो सहयोगियों के बीच चिंता का माहौल है। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि “शायद” वे ऐसा कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने इटली और स्पेन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इन देशों ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। ट्रंप ने खास तौर पर ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर दोनों देशों की आलोचना का जिक्र किया। ट्रंप ने तीखे शब्दों में कहा, “देखिए, मैं ऐसा क्यों न करूं? इटली ने हमारी कोई मदद नहीं की है और स्पेन का रवैया बेहद खराब रहा है।” उनके इस बयान ने यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में संभावित तनाव की आशंका को और बढ़ा दिया है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और ट्रंप के बीच पहले अच्छे संबंध माने जाते थे, लेकिन ईरान संघर्ष को लेकर मतभेद के बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ गई है। मेलोनी ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं किया और कुछ मामलों में सहयोग से भी इनकार किया, जिसमें सिसिली स्थित एयरबेस के उपयोग को अनुमति न देना शामिल है। ट्रंप ने मेलोनी की आलोचना करते हुए उन पर “साहस की कमी” का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिन देशों ने अमेरिका के सैन्य अभियानों में सहयोग नहीं किया, उनके साथ भविष्य की रणनीति पर पुनर्विचार किया जाएगा।
यह पहला मामला नहीं है जब ट्रंप ने यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती पर सवाल उठाए हों। इससे पहले उन्होंने जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की संभावना जताई थी। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस के अनुसार, 2024 में जर्मनी में 35,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात थे, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 50,000 के करीब बताई जा रही है। ट्रंप के इस रुख के बाद अब इटली और स्पेन भी उस सूची में शामिल हो गए हैं, जिन पर अमेरिकी सैन्य उपस्थिति में बदलाव का खतरा मंडरा रहा है। इस घटनाक्रम ने यूरोप और अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।