चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान राजनीतिक घटनाक्रम काफी अहम रहा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में अपनी सरकार के प्रति भरोसा जताते हुए कॉन्फिडेंस मोशन (विश्वास प्रस्ताव) पेश किया, जिसे बाद में विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस दौरान विपक्ष की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया।
94 विधायकों वाली आम आदमी पार्टी के कुल 88 विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 6 विधायक मतदान प्रक्रिया से बाहर रहे। इनमें से दो विधायक वर्तमान में जेल में हैं, जबकि चार विधायक सदन में अनुपस्थित रहे। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। विश्वास मत के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पिछले कुछ समय से सरकार को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही थीं और मीडिया तथा राजनीतिक हलकों में “टूट” की खबरें प्रसारित की जा रही थीं। उन्होंने इन सभी अटकलों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि सरकार पूरी तरह स्थिर और एकजुट है।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि उनकी सरकार जनता के जनहित के एजेंडे पर काम कर रही है और किसी भी तरह के भ्रम या गलत प्रचार का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे संदेशों का उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाना था। सरकार ने स्थिति को स्पष्ट करने के लिए ही विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह साबित किया जा सके कि सरकार के पास स्पष्ट बहुमत मौजूद है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में फिलहाल स्थिरता के संकेत मिलते नजर आ रहे हैं।