बारिश से बचने की होड़ में कोलकाता के दुर्गा पंडाल में भगदड़

कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान दर्दनाक हादसा, 19 लोगों की मौत; पुलिस जांच में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की खामियां उजागर

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  • October 30, 2026 10:30 pm IST, Published 2 hours ago

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने पूरे देश को झकझोर दिया। 17 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 से 7:40 बजे के बीच अचानक हुई इस घटना में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। जिस पंडाल में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने और उत्सव का आनंद लेने पहुंचे थे, वहां कुछ ही मिनटों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इस हादसे के बाद कोलकाता पुलिस की जांच में सामने आए शुरुआती तथ्यों ने घटना के पीछे कई संभावित कारणों की ओर इशारा किया है। इनमें अचानक हुई बारिश, निकास द्वार के पास भीड़ का जमा होना, सीमित रास्ता, कमजोर भीड़ प्रबंधन और कथित भ्रामक घोषणाएं शामिल हैं।

बारिश शुरू होते ही निकास द्वार पर जमा हुई भीड़

कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, घटना के समय अचानक बारिश शुरू हो गई थी। पंडाल में मौजूद कई महिलाएं अपने कपड़ों और मेकअप को बारिश से बचाने के लिए बाहर निकलने वाले गेट के आसपास रुक गईं। कुछ महिलाएं बारिश में बाहर निकलने से बच रही थीं, जिसके कारण निकास द्वार के पास लोगों की संख्या लगातार बढ़ने लगी।

इसी दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती गई। प्रवेश और निकास के सीमित स्थान पर लोगों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। एक ही जगह पर बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से दबाव बढ़ा और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

भीड़ में मौजूद कुछ लोग संतुलन खोकर गिर पड़े। उनके ऊपर दूसरे लोग गिरते चले गए और देखते ही देखते स्थिति गंभीर भगदड़ में बदल गई। हालांकि पुलिस ने इसे शुरुआती जांच का हिस्सा बताया है और घटना के सभी कारणों की पड़ताल जारी है।

19 लोगों की मौत से उत्सव मातम में बदला

इस हादसे में 19 लोगों की मौत की पुष्टि सामने आई। कई श्रद्धालु घायल हुए, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों, पुलिस और राहतकर्मियों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संकरी गलियों और भारी भीड़ के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आईं। कुछ घायलों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

दुर्गा पूजा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में इस तरह की घटना ने श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे के बाद संबंधित पंडाल में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया।

सीमित निकास और संकरी गलियों ने बढ़ाई मुश्किल

चोरबागान क्षेत्र की गलियां अपेक्षाकृत संकरी हैं। ऐसे स्थान पर जब हजारों लोग एक साथ किसी पंडाल में पहुंचते हैं, तो सामान्य आवाजाही भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। जांच से जुड़े शुरुआती विवरणों में पंडाल के प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भीड़ की संख्या के अनुपात में पर्याप्त पुलिसकर्मी और प्रशिक्षित स्वयंसेवक तैनात थे या नहीं। महिलाओं की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए महिला स्वयंसेवकों की उपलब्धता भी जांच के दायरे में है।

इसके अतिरिक्त, सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों के पास उपलब्ध संचार उपकरणों के इस्तेमाल की भी पड़ताल की जा रही है। जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि भीड़ बढ़ने की सूचना समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंची थी या नहीं और सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई।

पंडाल गिरने की घोषणा से फैली दहशत की भी जांच

इस हादसे में केवल बारिश और भीड़ ही जांच का विषय नहीं हैं। पुलिस कथित तौर पर पंडाल का एक हिस्सा गिरने की घोषणा से पैदा हुई दहशत की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पंडाल का हिस्सा गिरने की बात कहकर लोगों के बीच अफरा-तफरी फैलाने में भूमिका निभाई। ऐसी सूचना से पहले से दबाव झेल रही भीड़ में घबराहट और बढ़ सकती थी।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घोषणा किसने की, किस समय की गई और उसका भगदड़ शुरू होने से क्या संबंध था। इस मामले में सामने आए शुरुआती विवरणों के अनुसार, पुलिस ने अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कथित तौर पर भ्रामक घोषणा करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोग भी शामिल हैं।

आयोजकों और सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका पर सवाल

हादसे के बाद पूजा आयोजन समिति और सुरक्षा प्रबंधन की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित संख्या का आकलन किया गया था या नहीं।

क्या प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त रास्ते उपलब्ध थे? क्या आपातकालीन निकास की व्यवस्था प्रभावी थी? क्या बारिश की स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करने की कोई वैकल्पिक योजना बनाई गई थी? ऐसे कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

पंडाल की सुरक्षा में लगी निजी एजेंसी के कर्मचारियों की तैनाती और उनकी जिम्मेदारियों की भी जांच हो रही है। पुलिस पंडाल के कलाकार से भी पूछताछ कर चुकी है, ताकि पंडाल की संरचना और अंदरूनी रास्तों से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सके।

सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान अहम

जांच में सीसीटीवी कैमरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस उपलब्ध फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी है।

जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भीड़ का दबाव किस दिशा से बढ़ा, लोग किस रास्ते से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और भगदड़ शुरू होने से पहले सुरक्षा कर्मचारियों की स्थिति क्या थी।

करीब 90 गवाहों, जिनमें हादसे से बचे कुछ लोग भी शामिल हैं, के बयान जांच के लिए महत्वपूर्ण बताए गए हैं। इन बयानों से घटना के समय मौजूद परिस्थितियों और कथित घोषणाओं के क्रम को समझने में मदद मिल सकती है।

देशभर के धार्मिक आयोजनों के लिए बड़ी चेतावनी

कोलकाता की यह घटना देशभर में आयोजित होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। त्योहारों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में आयोजकों और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सजावट और आयोजन तक सीमित नहीं रह सकती।

भीड़ की क्षमता के अनुसार प्रवेश और निकास द्वार, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी, पर्याप्त रोशनी, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, स्पष्ट संकेतक और प्रभावी संचार व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।

बारिश या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में भीड़ को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने के लिए पहले से योजना तैयार रखना भी जरूरी है। किसी भी प्रकार की अफवाह या गलत घोषणा को रोकने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली पर निगरानी होनी चाहिए।

चोरबागान की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े आयोजनों में छोटी दिखने वाली व्यवस्थागत चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था में हुई वास्तविक चूकों की पूरी तस्वीर सामने आएगी। मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की मौत ने उत्सव के बीच सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है।

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