अहमदाबाद। गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगी रोक को लेकर हाई कोर्ट में शुक्रवार को नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने पहले इस प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया, लेकिन करीब चार घंटे बाद खंडपीठ ने उस फैसले पर रोक लगाते हुए पुरानी पाबंदी फिर से बहाल कर दी।
मुख्य न्यायाधीश मानस रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निर्जर देसाई की खंडपीठ ने गुजरात सरकार की तत्काल अपील पर यह आदेश दिया। अदालत के निर्देश के अनुसार, जिला कलेक्टर की ओर से जारी प्रतिबंध संबंधी अधिसूचना अगली सुनवाई तक लागू रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर को होगी।
शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे न्यायमूर्ति निशा ठाकोर की एकल पीठ ने सोमनाथ मंदिर के आसपास होटल और रेस्तरां चलाने वाले कारोबारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जिला कलेक्टर की अधिसूचना रद्द कर दी थी।
इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल इस आदेश को चुनौती दी। सरकारी वकील के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पहुंचने के बाद अदालत के निर्धारित समय के बाद खंडपीठ ने मामले की विशेष सुनवाई की। सुनवाई के बाद एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी गई।
खंडपीठ के आदेश के मुताबिक, 10 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना फिलहाल प्रभावी रहेगी। इसके तहत सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में और आसपास के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली छह निर्धारित सड़कों पर मांसाहारी भोजन बनाने, रखने और बेचने पर रोक लगाई गई है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि सोमनाथ मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व असाधारण है। सरकार ने हरिद्वार जैसे अन्य धार्मिक शहरों में लागू प्रतिबंधों का भी उदाहरण दिया। उसका तर्क था कि धार्मिक स्थलों के आसपास इस तरह की पाबंदियां तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर लगाई जा सकती हैं।
दूसरी ओर, होटल और रेस्तरां संचालकों ने अपनी याचिकाओं में कहा कि इस तरह की पाबंदियां उनके वैध कारोबार और आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार को प्रभावित करती हैं। उनका कहना था कि व्यवसाय करने की स्वतंत्रता के तहत उन्हें अपने प्रतिष्ठानों में कानूनी रूप से खाद्य पदार्थ बेचने का अधिकार मिलना चाहिए।
राज्य सरकार ने इसके जवाब में कहा कि कारोबार करने का संवैधानिक अधिकार हर स्थान पर हर तरह की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं देता। धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए जा सकते हैं।
फिलहाल, हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश के बाद सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहेगा। अब इस मामले में 26 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर होटल कारोबारियों और राज्य सरकार की नजर रहेगी।