विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को किट प्रदान करते हुए कहा कि पोषण संबंधी योजनाओं को सफल बनाने में इन कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वे सीधे समाज के उन वर्गों तक पहुंचती हैं, जिन्हें पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी सुविधाओं की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में उनके काम को आसान बनाने के लिए जरूरी संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ देश के भविष्य पर भी पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। परिवार, स्थानीय समुदाय, सामाजिक संस्थाओं और सरकारी विभागों को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा। रोहिणी में आयोजित इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके दैनिक कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना था। फील्ड किट मिलने से उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने में सहायता मिलेगी। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाई जाती है। ऐसे में कार्यकर्ताओं के पास जरूरी उपकरण और सामग्री होने से उनकी कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान देशभर में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार, बच्चों के सही विकास, महिलाओं के स्वास्थ्य और कुपोषण से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों को पोषण अभियान से जोड़ने का प्रयास भी किया जाता है। विजेंद्र गुप्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण मिलना बेहद जरूरी है। जीवन के शुरुआती चरण में पोषण की कमी होने से बच्चे के विकास पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक खानपान और स्वास्थ्य की नियमित देखभाल आवश्यक है। परिवारों को भी इस दिशा में जागरूक होना चाहिए।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इस पूरी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे घर-घर जाकर महिलाओं और परिवारों को पोषण के महत्व के बारे में जानकारी देती हैं। इसके अलावा बच्चों के वजन और विकास की निगरानी, स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने जैसे काम भी करती हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उनकी पहुंच के कारण पोषण अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए उनके योगदान को भी रेखांकित किया गया। उनके काम के जरिए सरकार की पोषण संबंधी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं। इसलिए उनके प्रशिक्षण, कार्य सुविधाओं और संसाधनों में सुधार करना जरूरी है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बच्चों को पौष्टिक भोजन देना, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और परिवारों में पोषण संबंधी सही आदतें विकसित करना सामूहिक प्रयासों का हिस्सा होना चाहिए। 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आयोजित यह कार्यक्रम दिल्ली में पोषण जागरूकता और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। फील्ड किट वितरण के जरिए कार्यकर्ताओं को सहयोग देने के साथ यह संदेश भी दिया गया कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान जनभागीदारी, जागरूकता और निरंतर प्रयासों से ही संभव है।