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IPS प्रीति यादव बनीं नोएडा की पहली महिला DCP, जानें उनकी प्रेरक कहानी

नोएडा। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में अपनी मेहनत, लगन और काबिलियत के दम पर नई पहचान बनाने वाली आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में उन्हें नोएडा जोन का पुलिस उपायुक्त (DCP) बनाए जाने की खबर सामने आई है। इस नियुक्ति को महिला सशक्तीकरण और पुलिस प्रशासन […]

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  • October 31, 2026 10:00 pm IST, Published 4 minutes ago

नोएडा। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में अपनी मेहनत, लगन और काबिलियत के दम पर नई पहचान बनाने वाली आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में उन्हें नोएडा जोन का पुलिस उपायुक्त (DCP) बनाए जाने की खबर सामने आई है। इस नियुक्ति को महिला सशक्तीकरण और पुलिस प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत की मिसाल पेश करने वाली प्रीति यादव की उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सिविल सेवा में जाने का सपना देखते हैं। खास बात यह है कि उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने कम उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई और कुछ ही वर्षों में पुलिस विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचीं।

22 साल में UPSC, अब नोएडा की पहली महिला DCP बनीं प्रीति यादव

नोएडा। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में अपनी मेहनत, लगन और काबिलियत के दम पर नई पहचान बनाने वाली आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में उन्हें नोएडा जोन-1 का पुलिस उपायुक्त (DCP) नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही वह नोएडा जोन-1 की पहली महिला डीसीपी बन गई हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो कठिन परिस्थितियों में रहकर बड़े सपने देखते हैं।

एक पुलिसकर्मी की बेटी से भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी बनने तक का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी है। महज 22 वर्ष की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर उन्होंने अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया था। अब सात वर्षों के भीतर नोएडा जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रशासनिक करियर का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सौंपी नई जिम्मेदारी

गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में हालिया प्रशासनिक फेरबदल के दौरान आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव को नोएडा जोन-1 का डीसीपी नियुक्त किया गया। इससे पहले इस पद की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी साद मियां खान संभाल रहे थे, जिनका स्थानांतरण आगरा पुलिस कमिश्नरेट में किया गया है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रीति यादव को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। नोएडा जोन-1 प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियां, आवासीय सोसायटियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और यातायात का लगातार बढ़ता दबाव पुलिस के सामने कई तरह की चुनौतियां प्रस्तुत करता है।

ऐसे क्षेत्र में डीसीपी की जिम्मेदारी संभालना किसी भी अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व है। प्रीति यादव की नियुक्ति को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।

हरियाणा के रेवाड़ी से जुड़ा है परिवार

आईपीएस प्रीति यादव मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। उनका जन्म 10 अप्रैल 1996 को हुआ था। उनके पिता मुकेश यादव पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत रहे हैं। पुलिस परिवार से जुड़ाव होने के कारण बचपन से ही उन्हें पुलिस सेवा, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी को करीब से देखने का अवसर मिला।

उनके पिता ने पुलिस विभाग में अपनी सेवा के माध्यम से परिवार को मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा का महत्व समझाया। यही प्रेरणा आगे चलकर प्रीति यादव के जीवन में एक बड़े लक्ष्य का आधार बनी। उन्होंने सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आगे बढ़ते हुए देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा में स्थान हासिल करने का सपना पूरा किया।

उनकी कहानी यह बताती है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके परिवार की आर्थिक या सामाजिक स्थिति से तय नहीं होती, बल्कि उसके लक्ष्य, परिश्रम और इच्छाशक्ति से बनती है।

पढ़ाई में शुरू से रहीं मेधावी

प्रीति यादव की शैक्षणिक यात्रा भी उनकी उपलब्धियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने भूगोल विषय में बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के प्रति उनकी गंभीरता और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए मजबूत आधार दिया।

यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। इसमें सफलता के लिए केवल विषयों की जानकारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नियमित अध्ययन, विश्लेषण क्षमता, समय प्रबंधन और मानसिक दृढ़ता भी आवश्यक होती है।

प्रीति यादव ने इन चुनौतियों का सामना करते हुए सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 466 हासिल की थी। इसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया।

2019 बैच की IPS अधिकारी हैं प्रीति यादव

प्रीति यादव वर्ष 2019 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और पुलिस प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू किया।

उनके करियर में अलग-अलग स्तरों पर काम करने का अनुभव शामिल रहा है। सहारनपुर में शुरुआती तैनाती के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में भी उन्हें महत्वपूर्ण विभागों में कार्य करने का अवसर मिला।

वह महिला सुरक्षा और साइबर अपराध से संबंधित जिम्मेदारियों से जुड़ी रही हैं। इन क्षेत्रों में काम करने का अनुभव उन्हें नई जिम्मेदारी निभाने में मददगार साबित हो सकता है। महिला सुरक्षा, डिजिटल अपराध और नागरिकों की शिकायतों से जुड़े मामलों की समझ आज के पुलिस प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

महिला सुरक्षा और साइबर अपराध पर रहेंगी नजरें

नोएडा तेजी से विकसित हो रहा शहर है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से लोग नौकरी, कारोबार और शिक्षा के लिए आते हैं। इसके साथ ही साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, महिलाओं की सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।

डीसीपी जोन-1 के रूप में प्रीति यादव के सामने इन सभी क्षेत्रों में प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करने की चुनौती होगी। खासकर महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा, साइबर अपराध के प्रति जागरूकता तथा आम नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।

हालांकि नई जिम्मेदारी के तहत उनकी प्राथमिकताओं और कार्ययोजना को लेकर आधिकारिक विस्तृत घोषणा का इंतजार रहेगा।

कला में भी है विशेष रुचि

प्रीति यादव को केवल एक अनुशासित पुलिस अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि कला में रुचि रखने वाली व्यक्तित्व के तौर पर भी जाना जाता है। उनकी कहानी का यह पहलू बताता है कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी व्यक्ति अपनी रचनात्मक रुचियों को जीवित रख सकता है।

आमतौर पर पुलिस अधिकारियों की पहचान उनकी जिम्मेदारियों और कार्यशैली से होती है, लेकिन किसी अधिकारी के व्यक्तित्व में मौजूद रचनात्मक पक्ष भी उसे एक अलग पहचान देता है। प्रीति यादव की उपलब्धियां युवाओं को यह संदेश देती हैं कि लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ अपनी रुचियों और व्यक्तित्व का विकास भी जारी रखा जा सकता है।

युवाओं और बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

प्रीति यादव की सफलता की कहानी उन परिवारों के लिए खास मायने रखती है, जहां संसाधनों की सीमाएं होने के बावजूद बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उनके पिता पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल रहे, लेकिन बेटी ने अपनी मेहनत और शिक्षा के दम पर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई।

आज वह नोएडा जोन-1 की पहली महिला डीसीपी के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि बेटियों को अवसर और परिवार का सहयोग मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं।

उनकी नियुक्ति पुलिस प्रशासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करती है। महिला अधिकारी अब कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जांच और प्रशासनिक नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा रही हैं।

नोएडा में नई जिम्मेदारी से बढ़ीं उम्मीदें

नोएडा जोन-1 की पहली महिला डीसीपी बनने के बाद प्रीति यादव से क्षेत्र के नागरिकों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। लोगों को उम्मीद होगी कि पुलिस और आम जनता के बीच संवाद मजबूत होगा तथा अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा।

उनकी नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व और युवा अधिकारियों की क्षमता का भी उदाहरण है। अब देखना होगा कि नई जिम्मेदारी के तहत वह नोएडा की कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में किस तरह अपनी कार्यशैली से नई पहचान स्थापित करती हैं।

प्रीति यादव का सफर एक प्रेरक संदेश देता है—सपने बड़े हों, मेहनत लगातार हो और लक्ष्य के प्रति विश्वास मजबूत हो, तो सफलता की राह बनाई जा सकती है।

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