सुप्रीम कोर्ट से आजम खान को तत्काल राहत नहीं

आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में चल रही कानूनी कार्रवाई लंबे समय से राजनीतिक और...

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  • November 2, 2026 1:10 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर कानूनी मोर्चे पर चर्चा में हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई उनकी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से मामले में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने भरोसा दिया है कि याचिका को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।

आजम खान की ओर से दायर याचिका का उल्लेख उनके वकील निजाम पाशा ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सामने किया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर जल्द सुनवाई की जाए। शुरुआत में चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी। हालांकि, मामले को उठाए जाने के बाद पीठ ने इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया। इस तरह फिलहाल तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं हुई है, लेकिन आजम खान को इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है।

याचिका में गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए हैं। आजम खान के वकील ने अदालत को बताया कि 29 अक्टूबर को उन्हें ‘डुअल पैन कार्ड’ से जुड़े मामले में जेल से रिहा किया गया था। वकील के मुताबिक, रिहाई के करीब 40 मिनट बाद ही ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से इस घटनाक्रम को आधार बनाते हुए गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल खड़े किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में एक नवंबर को विशेष अदालत की ओर से पारित उस आदेश को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत आजम खान को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है। इसके साथ ही अदालत से अपील की गई है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक आजम खान को हिरासत से रिहा किया जाए। याचिका में गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत से जुड़े फैसलों की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।

आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में चल रही कानूनी कार्रवाई लंबे समय से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है। ताजा मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें ईडी की कार्रवाई के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। अब इस मामले में सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर रहेगी। अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के आदेश को चुनौती देने के आधार रखे जाएंगे। वहीं, ईडी और अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष भी सुनवाई के दौरान सामने आ सकता है। फिलहाल शीर्ष अदालत ने गिरफ्तारी पर कोई तत्काल राहत नहीं दी है और न ही याचिका के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला सुनाया है। इस सप्ताह होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आजम खान को गिरफ्तारी के मामले में कोई राहत मिलती है या उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे भी हिरासत में रहना होगा।

 

 

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