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यूपी में 25 नवंबर को विद्युत संविदाकर्मी करेंगे सत्याग्रह, 10 दिसंबर को शक्ति भवन पर महा रैली

उत्तर प्रदेश के 78 हजार विद्युत संविदा कर्मियों ने आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने, वेतन वृद्धि और सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने की मांग उठाई। 25 नवंबर को प्रदेशव्यापी सत्याग्रह और 10 दिसंबर को शक्ति भवन पर रैली होगी।

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  • November 1, 2026 9:12 pm IST, Published 21 minutes ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में कार्यरत करीब 78 हजार संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। विद्युत संविदा मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश ने स्पष्ट किया है कि यदि संविदा कर्मियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग जल्द पूरी नहीं की गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने इसके तहत 25 नवंबर को प्रदेश के सभी जिलों में एक दिवसीय सत्याग्रह करने और 10 दिसंबर को राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर विशाल रैली आयोजित करने का निर्णय लिया है।

संगठन का कहना है कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बिजली आपूर्ति से जुड़े कई आवश्यक कार्यों की जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों के कंधों पर है। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह सुविधाएं और पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि लंबे समय से काम करने के बावजूद संविदा कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।

78 हजार संविदा कर्मियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग

विद्युत संविदा मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी बैठक रविवार को लखनऊ के नरही स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष नवल किशोर सक्सेना ने की। इसमें प्रदेशभर से संगठन के प्रमुख पदाधिकारी और श्रमिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा ऊर्जा निगमों में कार्यरत लगभग 78 हजार संविदा कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल किए जाने का रहा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि संविदा कर्मचारी वर्षों से बिजली विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे बिजली लाइनों के रखरखाव, उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान, बिजली आपूर्ति बहाल करने और अन्य तकनीकी कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

इसके बावजूद उनके रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। संगठन का मानना है कि आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल किए जाने से कर्मचारियों को रोजगार संबंधी सुरक्षा और सेवा शर्तों में सुधार की दिशा में मदद मिल सकती है।

25 नवंबर को सभी जिलों में होगा एक दिवसीय सत्याग्रह

बैठक में संगठन ने आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 25 नवंबर को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में एक दिवसीय सत्याग्रह आयोजित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम के माध्यम से संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को प्रशासन और ऊर्जा निगम प्रबंधन तक पहुंचाएंगे। संगठन ने प्रदेश के सभी जिला इकाइयों को आंदोलन की तैयारी शुरू करने और अधिक से अधिक कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है।

इसके बाद भी यदि मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो 10 दिसंबर को लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर विशाल रैली आयोजित की जाएगी। संगठन की योजना है कि इस रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल होकर अपनी मांगों को उठाएंगे।

पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के रुख पर संगठन ने जताई नाराजगी

बैठक के दौरान पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की गई। संगठन पदाधिकारियों ने ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल किए जाने के संबंध में प्रबंधन की ओर से की गई असहमति अथवा संस्तुति का विरोध किया।

संगठन की बैठक में इस विषय पर चर्चा करते हुए कहा गया कि कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

संगठन के नेताओं का कहना है कि जब बिजली व्यवस्था को चलाने में संविदा कर्मचारियों की इतनी बड़ी भूमिका है तो उनके वेतन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

न्यूनतम 22 हजार रुपये वेतन देने की मांग

विद्युत संविदा मजदूर संगठन ने कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की मांग को भी प्रमुखता से उठाया है। संगठन के अनुसार संविदा श्रमिकों को न्यूनतम 22 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाना चाहिए।

वहीं, सब स्टेशन ऑपरेटर (एसएसओ) और लाइनमैन जैसे तकनीकी एवं जिम्मेदारी वाले पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करने की मांग की गई है।

संगठन का कहना है कि बिजली विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं। कई बार तकनीकी खराबियों को दूर करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में उनके कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उचित वेतन दिया जाना आवश्यक है।

पदाधिकारियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में मौजूदा वेतन से कर्मचारियों के परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। इसलिए वेतन संबंधी मांगों पर भी सरकार और ऊर्जा निगम प्रबंधन को निर्णय लेना चाहिए।

सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने की भी मांग

वेतन वृद्धि के साथ संगठन ने संविदा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक ऊर्जा निगमों में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।

कर्मचारियों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उन्हें निर्धारित आयु तक रोजगार का अवसर और आर्थिक सुरक्षा मिल सके। संगठन ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा अवधि, अनुभव और कार्यक्षमता को देखते हुए सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष की जानी चाहिए।

संगठन के मुताबिक रोजगार की सुरक्षा केवल कर्मचारियों का व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और सामाजिक भविष्य भी जुड़ा हुआ है।

पुनीत राय बोले- संविदा कर्मियों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं

बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के प्रांतीय प्रभारी पुनीत राय ने कहा कि पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ संविदा कर्मचारी हैं। बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने में इन कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है, लेकिन जब उनके अधिकारों और हितों की बात आती है तो उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारियों का शोषण लगातार बढ़ रहा है। लंबे समय से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है।

पुनीत राय ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने और संगठन की ओर से घोषित कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।

आरएस राय ने कर्मचारियों से एकजुट होने का किया आह्वान

बैठक में वरिष्ठ मजदूर नेता आरएस राय ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने प्रदेश के सभी संविदा कर्मचारियों से अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष में शामिल होने की अपील की।

उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की ताकत उसकी एकता और सामूहिक भागीदारी में होती है। इसलिए कर्मचारियों को आपसी मतभेद भुलाकर अपनी जायज मांगों के लिए संगठित प्रयास करना चाहिए।

बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नवल किशोर सक्सेना सहित विभिन्न पदाधिकारियों ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर संपर्क और तैयारियां तेज करने पर जोर दिया।

बैठक में कई पदाधिकारी रहे मौजूद

कार्यकारिणी बैठक में जितेंद्र कुमार, आशीष कुमार, राजीव रंजन राय, मोहम्मद सरफराज, राजेश्वर सिंह, सुनील गोस्वामी, संजय सिंह, आनंद सिंह, विमल सिंह, अंकित अस्थाना, अरविंद कुमार, मनीष पाल और राजू अंबेडकर सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में संगठन ने दोहराया कि संविदा कर्मचारियों की मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। अब सभी की नजर 25 नवंबर को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी सत्याग्रह और 10 दिसंबर को शक्ति भवन पर होने वाली रैली पर टिकी है।

यदि इन मांगों पर सहमति बनती है तो प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था से जुड़े संविदा कर्मचारियों का आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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