नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों की एशियाई रैंकिंग को लेकर जारी ताजा रिपोर्ट ने भारतीय शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स: एशिया 2027 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान बना हुआ है, लेकिन एशिया में इसकी रैंकिंग पिछले वर्ष के मुकाबले नीचे आ गई है। दूसरी ओर, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) भी एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हो गया है। पिछले वर्ष 95वें स्थान पर रहने वाला दिल्ली विश्वविद्यालय इस बार 106वें स्थान पर पहुंच गया है।
इस रिपोर्ट ने देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के सामने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, शोध की गुणवत्ता, वैश्विक पहचान और उच्च शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की चुनौती को फिर से सामने ला दिया है। हालांकि, रैंकिंग में गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सीधे तौर पर गिरावट आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, रैंकिंग कई अलग-अलग मानकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के आधार पर तैयार की जाती है।
QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली ने भारतीय संस्थानों के बीच अपनी पहली स्थिति बरकरार रखी है। हालांकि, एशियाई स्तर पर संस्थान को सात स्थानों का नुकसान हुआ है। पिछले वर्ष IIT दिल्ली 59वें स्थान पर था, जबकि इस बार उसे 66वीं रैंक मिली है।
यह परिणाम IIT दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि संस्थान लंबे समय से देश के प्रमुख तकनीकी और शोध संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में इसकी उपलब्धियां इसे राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाती हैं। इसके बावजूद एशियाई रैंकिंग में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
IIT दिल्ली की रैंकिंग में आई गिरावट यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए संस्थानों को लगातार शोध, अकादमिक सहयोग और वैश्विक सहभागिता पर काम करना होगा।
देश के दूसरे प्रमुख संस्थानों की स्थिति भी इस बार पूरी तरह उत्साहजनक नहीं रही। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु को एशिया में 79वां स्थान मिला है, जबकि पिछले वर्ष यह 64वें स्थान पर था। इस तरह संस्थान की रैंकिंग में 15 स्थान की गिरावट दर्ज की गई।
इसी प्रकार IIT बॉम्बे पिछले वर्ष 71वें स्थान पर था, लेकिन इस बार 83वें स्थान पर पहुंच गया। IIT मद्रास को 85वीं रैंक मिली है, जबकि पिछले वर्ष यह 70वें स्थान पर था।
IIT खड़गपुर की रैंकिंग भी 77वें से गिरकर 90वें स्थान पर पहुंच गई। वहीं IIT कानपुर को इस बार 97वां स्थान मिला है, जबकि पिछले वर्ष यह 77वें स्थान पर था।
इस प्रकार भारत के छह शीर्ष संस्थानों की एशियाई रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। इन संस्थानों का प्रदर्शन भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ये संस्थान तकनीकी शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए इस बार की रैंकिंग चिंता का विषय है। पिछले वर्ष QS एशिया रैंकिंग में 95वें स्थान पर रहने वाला विश्वविद्यालय इस बार 106वें स्थान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय एशिया के शीर्ष 100 संस्थानों की सूची से बाहर हो गया है।
हालांकि, दिल्ली के ही एक अन्य प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने बेहतर प्रदर्शन किया है। JNU पिछले वर्ष 130वें स्थान पर था, जबकि इस बार 128वीं रैंक हासिल करने में सफल रहा है।
इसी तरह जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने भी अपनी स्थिति में सुधार किया है। पिछले वर्ष 197वें स्थान पर रहने वाला जामिया इस बार 183वें स्थान पर पहुंच गया है। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच प्रदर्शन में अंतर देखने को मिल रहा है। जहां कुछ संस्थानों की रैंकिंग नीचे आई है, वहीं कई विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति मजबूत की है।
QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारतीय संस्थानों की स्थिति पिछले वर्ष के मुकाबले इस प्रकार रही है:
| भारतीय संस्थान | 2027 रैंक | 2026 रैंक |
| ————————- | ——— | ——— |
| IIT दिल्ली | 66 | 59 |
| IISc बेंगलुरु | 79 | 64 |
| IIT बॉम्बे | 83 | 71 |
| IIT मद्रास | 85 | 70 |
| IIT खड़गपुर | 90 | 77 |
| IIT कानपुर | 97 | 77 |
| चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी | 104 | 109 |
| दिल्ली विश्वविद्यालय | 106 | 95 |
| IIT गुवाहाटी | 120 | 115 |
| IIT रुड़की | 124 | 114 |
| JNU | 128 | 130 |
| जामिया मिल्लिया इस्लामिया | 183 | 197 |
यह सूची बताती है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी दिलचस्प हो गई है। खास बात यह है कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, जामिया और JNU जैसे संस्थानों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है।
जहां देश के प्रमुख IIT संस्थानों और दिल्ली विश्वविद्यालय की रैंकिंग नीचे आई है, वहीं कुछ अन्य विश्वविद्यालयों ने उल्लेखनीय सुधार किया है।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने पिछले वर्ष 109वीं रैंक हासिल की थी, जबकि इस बार 104वें स्थान पर पहुंच गई है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 187वें स्थान से 154वें स्थान तक का सफर तय किया है।
सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की रैंकिंग 200 से सुधरकर 175 हो गई है। मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन भी 206वें स्थान से आगे बढ़कर 195वें स्थान पर पहुंच गई है।
इन परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में केवल पारंपरिक प्रतिष्ठित संस्थान ही नहीं, बल्कि निजी विश्वविद्यालय भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
QS एशिया रैंकिंग 2027 में भारत की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। इस बार भारत के कुल 325 विश्वविद्यालयों को रैंकिंग में शामिल किया गया है। पिछले संस्करण के मुकाबले 34 नए भारतीय संस्थानों ने इस सूची में जगह बनाई है।
एशिया के उच्च शिक्षा परिदृश्य में भारत दूसरा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश बना हुआ है। यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था के विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
हालांकि, बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों का सूची में शामिल होना अपने आप में पर्याप्त उपलब्धि नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर स्थान हासिल करने के लिए संस्थानों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध के परिणाम, उद्योगों के साथ सहयोग और विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक संबंधों पर भी ध्यान देना होगा।
इस वर्ष की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि रैंकिंग में शामिल लगभग 71 प्रतिशत भारतीय विश्वविद्यालयों की स्थिति पिछले वर्ष के मुकाबले नीचे आई है। लगभग 18 प्रतिशत संस्थानों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया, जबकि 11 प्रतिशत संस्थानों की स्थिति लगभग समान रही।
हालांकि, इस आंकड़े को समझते समय एक महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखना जरूरी है। QS के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर के अनुसार, रैंकिंग में नीचे जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित संस्थानों का वास्तविक शैक्षणिक प्रदर्शन कमजोर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैंकिंग में नीचे आने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों में से लगभग दो-तिहाई ने अपने समग्र स्कोर में सुधार किया है।
इसका मतलब है कि कई संस्थानों ने अपने प्रदर्शन में प्रगति की, लेकिन एशिया के दूसरे विश्वविद्यालयों की प्रतिस्पर्धा और बेहतर परिणामों के कारण उनकी रैंकिंग नीचे चली गई। इसलिए केवल रैंकिंग के आधार पर किसी विश्वविद्यालय की शिक्षा की गुणवत्ता का अंतिम मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।
विशेषज्ञों के नजरिए से भारतीय विश्वविद्यालयों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की है। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों, शोध के प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय शिक्षकों और विद्यार्थियों की भागीदारी तथा वैश्विक अकादमिक सहयोग को बढ़ाना जरूरी है।
विश्वविद्यालयों को केवल पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इंजीनियरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भी शोध को बढ़ावा देना होगा।
इसके अलावा उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना भी आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 के परिणाम भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। एक तरफ भारत के 325 विश्वविद्यालयों की भागीदारी और नए संस्थानों का प्रवेश सकारात्मक संकेत है, वहीं दूसरी तरफ IIT दिल्ली, IISc बेंगलुरु, IIT बॉम्बे और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट चिंता का विषय है।
दिल्ली विश्वविद्यालय का एशिया के शीर्ष 100 संस्थानों से बाहर होना विशेष रूप से चर्चा में है। वहीं IIT दिल्ली का भारत में पहला स्थान बरकरार रहना देश के लिए राहत की बात है।
अब चुनौती केवल विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में गुणवत्ता के नए मानक स्थापित करने की है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय संस्थान अपनी शोध क्षमता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को कितना मजबूत कर पाते हैं।