नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज में 3 एवं 4 नवंबर 2026 को दो दिवसीय पुस्तक मेले का सफल आयोजन किया गया। इस पुस्तक मेले में 45 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों एवं पुस्तक वितरकों ने भाग लेकर आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। मेले के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और पुस्तक प्रेमियों को विभिन्न विषयों की पुस्तकों से परिचित होने तथा अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुरूप पुस्तकें खरीदने का अवसर मिला।
45 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने लिया हिस्सा, पुस्तकों को बताया समाज के भविष्य निर्माण का आधार
पुस्तक मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. बलदेव भाई शर्मा, पूर्व कुलपति, KTUJM एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) के पूर्व अध्यक्ष ने किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल समाज की धरोहर नहीं होतीं, बल्कि वे उसके भविष्य की निर्माता भी हैं। पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान, विचार और संस्कारों का प्रसार होता है। ये व्यक्ति के बौद्धिक विकास के साथ-साथ समाज में सकारात्मक चेतना और रचनात्मक सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि पुस्तकों के साथ जुड़ाव व्यक्ति की सोच को व्यापक बनाता है। पढ़ने की आदत न केवल ज्ञान का विस्तार करती है, बल्कि जीवन को समझने, सही निर्णय लेने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पहचानने की क्षमता भी विकसित करती है।
डिजिटल और मुद्रित पुस्तकों की उपयोगिता पर हुई चर्चा
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार तिवारी ने अपने संबोधन में डिजिटल एवं मुद्रित पुस्तकों की उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में पढ़ने के माध्यम भले ही बदल रहे हों, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है। डिजिटल पुस्तकें जहां विद्यार्थियों को सुविधाजनक और त्वरित जानकारी उपलब्ध कराती हैं, वहीं मुद्रित पुस्तकों के साथ अध्ययन का अनुभव एकाग्रता और गहन पठन को प्रोत्साहित करता है।
प्रो. तिवारी ने कहा कि पुस्तकें विद्यार्थी की सच्ची मित्र होती हैं। वे उसके संपूर्ण विकास में निःस्वार्थ भाव से सहभागी बनती हैं। पुस्तकों के अध्ययन से विद्यार्थियों के ज्ञान, विचारों, व्यक्तित्व और दृष्टिकोण में समृद्धि आती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना भी है। इस दिशा में पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
45 से अधिक प्रकाशकों की सहभागिता से बढ़ी मेले की रौनक
दो दिवसीय पुस्तक मेले में 45 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों और पुस्तक वितरकों की भागीदारी रही। विभिन्न प्रकाशन संस्थानों की ओर से अलग-अलग विषयों की पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों के अलावा साहित्य, इतिहास, संस्कृति, सामाजिक विज्ञान, समसामयिक विषयों और अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों तक पहुंच बनाने का अवसर प्रदान किया।
इस प्रकार के आयोजन उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुस्तक मेले विद्यार्थियों को पुस्तकों की दुनिया से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न लेखकों, विचारों और विषयों को समझने का अवसर भी देते हैं। इससे महाविद्यालय परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति उत्साह और ज्ञान अर्जन की भावना को बढ़ावा मिलता है।
पठन संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच विद्यार्थियों में नियमित पुस्तक अध्ययन की आदत विकसित करना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। ऐसे समय में महाविद्यालयों में पुस्तक मेलों का आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकों के करीब लाने का सार्थक प्रयास है।
महाराजा अग्रसेन कॉलेज में आयोजित इस पुस्तक मेले ने विद्यार्थियों को अपनी पसंद की पुस्तकों का चयन करने, नए विषयों की जानकारी प्राप्त करने और अध्ययन के प्रति अपनी रुचि को विस्तार देने का अवसर दिया। इस तरह के आयोजन शिक्षा को कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय व्यापक ज्ञान और विचारों से जोड़ने में सहायक साबित होते हैं।
पुस्तकालय समिति की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सत्य प्रकाश सिंह ने सभी अतिथियों, प्रकाशकों, पुस्तक वितरकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर पुस्तकालय समिति की संयोजक सुश्री पुनीता अग्रवाल सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी और पुस्तकालय समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
दो दिवसीय पुस्तक मेले का आयोजन विद्यार्थियों में पठन संस्कृति, ज्ञान अर्जन और पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। इसने एक बार फिर यह संदेश दिया कि तकनीक के विकास के बावजूद पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। पुस्तकें आज भी ज्ञान, संस्कार, विचार और समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।