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पटाखों के खिलाफ योगेंद्र कुमार की मुहिम, 8 हजार छात्र जागरूक

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और पटाखों से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति बच्चों एवं युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। तिहाड़ जेल के सहायक अधीक्षक योगेंद्र कुमार द्वारा 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित इस जागरूकता अभियान के अंतर्गत अब तक दिल्ली […]

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  • November 4, 2026 4:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और पटाखों से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति बच्चों एवं युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। तिहाड़ जेल के सहायक अधीक्षक योगेंद्र कुमार द्वारा 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित इस जागरूकता अभियान के अंतर्गत अब तक दिल्ली के चार विद्यालयों के लगभग 8,000 विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा चुका है। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने, पटाखों से दूरी बनाने तथा मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशु-पक्षियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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चार विद्यालयों में आयोजित हुई जागरूकता गतिविधियां

अभियान के अंतर्गत दिल्ली के चार प्रमुख विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें सर्वोदय कन्या विद्यालय नंबर-2, टैगोर गार्डन, नगर निगम विद्यालय प्रताप नगर, गवर्नमेंट बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, राजौरी गार्डन तथा स्वामी शिवानंद मेमोरियल स्कूल, ईस्ट पंजाबी बाग शामिल हैं।

इन विद्यालयों में ‘प्रदूषण एवं पटाखों का मानव एवं पशु-पक्षियों पर दुष्प्रभाव’ विषय पर निबंध लेखन और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण, पटाखों से होने वाले नुकसान, स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता और जीव-जंतुओं की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं, बल्कि उनके भीतर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता की भावना विकसित करना भी है।

पटाखों से होने वाले नुकसान की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान योगेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि पटाखों का इस्तेमाल वातावरण में प्रदूषण बढ़ाने के प्रमुख कारणों में से एक है। पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इससे सांस संबंधी परेशानियां, आंखों में जलन, गले में तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि दीपावली जैसे त्योहारों पर अत्यधिक आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ जाता है। तेज आवाज वाले पटाखों का प्रभाव विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है।

योगेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि पटाखों का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं रहता। बेजुबान पशु-पक्षी भी तेज आवाज और धुएं से प्रभावित होते हैं। पटाखों की तेज आवाज से कुत्ते, बिल्लियां और अन्य जानवर भयभीत हो जाते हैं। पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके सुरक्षित रहने की व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे स्वयं पटाखों से दूरी बनाएं और अपने परिवार, मित्रों तथा आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में बताएं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी दी गई जानकारी

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पटाखों के इस्तेमाल को लेकर माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की जानकारी भी दी गई। योगेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान विद्यार्थियों को न्यायालय द्वारा 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय के भीतर केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति तथा अन्य दिनों में पटाखों पर प्रतिबंध से संबंधित निर्देशों के बारे में अवगत कराया गया।

उन्होंने विद्यार्थियों को कानून और पर्यावरण संबंधी नियमों का सम्मान करने की आवश्यकता समझाई। साथ ही कहा कि त्योहारों की खुशियां मनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारी गतिविधियों से किसी दूसरे व्यक्ति, पशु-पक्षी या पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

इस दौरान बच्चों को ग्रीन पटाखों के प्रमाणन और निर्धारित नियमों के पालन के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।

प्रधानाचार्य ज्योति ने विद्यार्थियों से की विशेष अपील

कार्यक्रम में प्रधानाचार्य ज्योति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करने और अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की महत्वपूर्ण क्षमता रखते हैं। यदि विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण का संदेश अपने घरों तक पहुंचाते हैं, तो इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

उन्होंने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने वाला प्रयास बताया।

पर्यावरण संरक्षकों ने दिया संवेदनशीलता का संदेश

इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े रेखा बेरी, सोनू कपूर, राम निवास यादव एवं जतिन भल्ला ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। सभी ने बच्चों को स्वच्छ पर्यावरण के महत्व और पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने का संदेश दिया।

वक्ताओं ने कहा कि त्योहारों का वास्तविक आनंद तभी है, जब उनकी खुशियों में समाज के सभी वर्गों के साथ प्रकृति और बेजुबान जीवों की सुरक्षा भी शामिल हो। दीपावली रोशनी, उत्साह और खुशियों का पर्व है। इसे मनाते समय ऐसे विकल्प अपनाने चाहिए, जिनसे वातावरण दूषित न हो और किसी जीव को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल, स्वच्छता बनाए रखने, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।

30 नवंबर तक जारी रहेगा जागरूकता अभियान

योगेंद्र कुमार द्वारा संचालित यह विशेष जागरूकता अभियान 30 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा। अब तक चार विद्यालयों के लगभग 8,000 विद्यार्थियों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा चुका है। अभियान के आगामी चरणों में भी विद्यार्थियों और युवाओं को प्रदूषण के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने पर जोर रहेगा।

इस पहल का व्यापक उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाना है, ताकि वे केवल स्वयं प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से दूर न रहें, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें।

आज जब दिल्ली सहित देश के अनेक शहरों में वायु गुणवत्ता एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, ऐसे में विद्यालय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बच्चों को छोटी उम्र से ही पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देकर भविष्य की पीढ़ियों को अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकता है।

इस अभियान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि दीपावली की खुशियां पटाखों की आवाज और धुएं की मोहताज नहीं हैं। रोशनी, प्रेम, आपसी सद्भाव और स्वच्छ वातावरण के साथ भी त्योहार को यादगार बनाया जा सकता है। मानव स्वास्थ्य, प्रकृति और बेजुबान पशु-पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही पर्यावरण के प्रति हमारी सच्ची जिम्मेदारी है।

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