योगी का बड़ा दावा: यूपी में एक साल बैठाकर भी मिलेगी सैलरी

2017 में वेतन देने के लिए संसाधनों की कमी थी, आज आर्थिक स्थिति मजबूत होने का मुख्यमंत्री ने किया दावा; 4,543 नवनियुक्त दरोगाओं को बांटे नियुक्ति पत्र

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  • November 7, 2026 10:00 pm IST, Published 17 minutes ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति, सरकारी कर्मचारियों के वेतन और युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब प्रदेश की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे। वहीं, आज उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्तमान में प्रदेश सरकार के पास इतनी वित्तीय क्षमता है कि आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारियों को एक वर्ष तक काम पर बैठाए रखने के बावजूद उनका वेतन दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री का यह बयान लखनऊ की रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान सामने आया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (दरोगा) पद पर चयनित 4,543 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, युवाओं को रोजगार के अवसर, प्रदेश की आर्थिक प्रगति और पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान सरकारी भर्तियों की स्थिति पर भी अपनी बात रखी।

2017 से अब तक आर्थिक स्थिति में बदलाव का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले और वर्तमान समय की आर्थिक परिस्थितियों की तुलना करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या आज की तुलना में लगभग आधी होने के बावजूद वेतन भुगतान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सरकार के पास कर्मचारियों के वेतन और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं थे।

उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। सरकार की वित्तीय क्षमता बढ़ी है और अब प्रदेश अपने कर्मचारियों को वेतन देने की बेहतर स्थिति में है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को एक वर्ष तक बैठाकर भी वेतन दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री का यह बयान प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार के दृष्टिकोण को सामने रखता है। हालांकि, एक वर्ष तक वेतन देने की क्षमता से संबंधित यह मुख्यमंत्री का दावा है। इसकी वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन सरकारी बजट, राजस्व प्राप्तियों, वेतन मद और अन्य सार्वजनिक वित्तीय आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

4,543 नवनियुक्त दरोगाओं को मिले नियुक्ति पत्र

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उत्तर प्रदेश पुलिस में चयनित 4,543 उपनिरीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान करना रहा। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में नियुक्ति केवल रोजगार प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज और प्रदेश की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पुलिसकर्मियों से बातचीत करते हुए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के संबंध में सवाल भी पूछे। उन्होंने अभ्यर्थियों से जानना चाहा कि क्या नौकरी पाने के लिए किसी को सिफारिश करवानी पड़ी, क्या किसी स्तर पर पैसे की मांग हुई या किसी ने नियुक्ति के लिए रिश्वत देने का प्रयास किया।

उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में योग्यता और निष्पक्ष चयन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवाओं को बिना भेदभाव और बिना अनुचित दबाव के अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, सरकारी नौकरी किसी की कृपा नहीं, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों को मिलने वाला अधिकार और सरकार का दायित्व है।

सरकारी भर्ती व्यवस्था पर पिछली सरकारों को घेरा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2003 से 2017 के बीच प्रदेश में हुई सरकारी भर्तियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान कई भर्तियों में अनियमितताएं हुईं और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ मामलों में आवेदन किसी व्यक्ति ने किया, परीक्षा किसी अन्य व्यक्ति ने दी और नौकरी किसी तीसरे व्यक्ति को मिल गई। उन्होंने बताया कि ऐसी भर्तियों से जुड़े कई मामले अभी भी न्यायालयों में लंबित हैं।

उन्होंने यह चिंता भी व्यक्त की कि यदि भविष्य में न्यायालय किसी भर्ती को रद्द करने या नियुक्तियां समाप्त करने का आदेश देता है तो वर्षों से सेवा कर रहे संबंधित कर्मचारियों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने कथित तौर पर अनियमितताओं के माध्यम से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों में दोषियों की संपत्ति जब्त करने की बात भी कही।

एक लाख से अधिक नई नियुक्तियों का लक्ष्य

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों के अवसरों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले 9.50 लाख सरकारी नियुक्तियां पूरी करने का लक्ष्य हासिल किया और इसके बाद एक लाख अतिरिक्त नियुक्तियों का संकल्प लिया था। अब यह लक्ष्य भी पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार देने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, आने वाले समय में विभिन्न विभागों में नियुक्तियों के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने लगभग 25 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की बात कही। इसके अलावा 42 हजार होमगार्ड तथा लगभग 32 हजार पुलिस कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल से संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि दीपावली के बाद विभिन्न विभागों में नियुक्ति पत्र वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उनका कहना था कि युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

महिला सुरक्षा और रोजगार के अवसरों का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में महिला सुरक्षा और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार और कामकाज के अवसरों में वृद्धि हुई है।

इस दौरान उन्होंने लखनऊ स्थित एचसीएल टेक परिसर का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2017 में वहां लगभग 100 लोग काम करते थे, जबकि अब कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब 12,500 हो गई है। मुख्यमंत्री ने नई सुविधाओं के माध्यम से भविष्य में लगभग छह हजार और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना भी जताई।

उनके अनुसार, प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने महिला कार्यबल की भागीदारी में वृद्धि को भी प्रदेश में बदलते रोजगार परिदृश्य से जोड़कर प्रस्तुत किया।

युवाओं के लिए रोजगार और पारदर्शिता सबसे बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और युवा आबादी वाले राज्य में सरकारी रोजगार हमेशा एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और सरकारी विभागों में नियुक्ति की प्रतीक्षा करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया का समय पर पूरा होना, परीक्षा में पारदर्शिता, परिणामों की निष्पक्षता और नियुक्ति पत्र का समय पर वितरण बेहद महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री के संबोधन में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को रोकने पर भी जोर दिखाई दिया। हालांकि, सरकार के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती बनी रहती है कि प्रत्येक भर्ती समयबद्ध तरीके से पूरी हो और चयनित अभ्यर्थियों को बिना अनावश्यक देरी के नियुक्ति मिल सके।

प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए राजस्व वृद्धि, निवेश, औद्योगिक विकास और सरकारी खर्चों के बीच संतुलन भी जरूरी है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान की क्षमता का सीधा संबंध राज्य के वित्तीय प्रबंधन से होता है।

फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वर्ष तक कर्मचारियों को बैठाकर वेतन देने वाला बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही 4,543 नवनियुक्त दरोगाओं को नियुक्ति पत्र वितरण और आगामी भर्तियों को लेकर दिए गए संकेतों ने प्रदेश के युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का ध्यान आकर्षित किया है। अब युवाओं की निगाहें आगामी भर्ती प्रक्रियाओं और नियुक्ति संबंधी घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेंगी।

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