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बंगाल चुनाव का हवाला देकर अखिलेश का आरोप, SIR से कटवाए गए वोटरों के नाम

सपा अध्यक्ष के इस बयान को उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन किया जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को

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  • November 6, 2026 5:00 pm IST, Published 22 minutes ago

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भारतीय जनता पार्टी तथा चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पहले से ही अपनी आशंकाएं जाहिर करता रहा है, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल के चुनाव का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां SIR और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का इस्तेमाल भाजपा को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए किया गया।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि SIR को लेकर विपक्ष के कई नेताओं और राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। विपक्ष ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए, लेकिन चुनाव आयोग इन चिंताओं का स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।

सपा प्रमुख ने पश्चिम बंगाल के चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां SIR की प्रक्रिया और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के जरिए भाजपा को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कार्रवाई ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। हालांकि, ये आरोप अखिलेश यादव की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है। अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां करीब तीन लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की बात सामने आई थी। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों को पश्चिम बंगाल भेजा गया था। उन्होंने इस तैनाती को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश से गए ये जवान वापस भी प्रदेश में ही आएंगे।

सपा अध्यक्ष के इस बयान को उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और चुनावी तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन किया जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना होता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान नामों के सत्यापन, हटाने और नए नाम जोड़ने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अक्सर मतभेद सामने आते हैं। अखिलेश यादव ने अपने बयान के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है। यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर किसी तरह की आशंका या शिकायत सामने आती है, तो उसका पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण और चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती जैसे मुद्दे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। विपक्ष इन मुद्दों के माध्यम से चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर बहस तेज कर सकता है, जबकि चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इन मुद्दों पर अपनी आपत्तियां और सवाल उठाती रहेगी। अब देखना होगा कि SIR को लेकर विपक्ष की चिंताओं पर चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।


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