प्रयागराज: टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए इलहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि बिना स्पष्ट कारण बताए किसी निविदा को खारिज करना उचित नहीं है।मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि उसकी तकनीकी बोली पहले ही स्वीकार कर ली गई थी और वह सबसे ऊंची बोली लगाने वालों में शामिल था। इसके बावजूद उसके दस्तावेजों को बिना किसी ठोस कमी का उल्लेख किए अस्वीकार कर दिया गया।
खंडपीठ ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि दस्तावेजों में कोई त्रुटि थी, तो संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा की कमी का तर्क भी सही नहीं है, क्योंकि कम से कम दो प्रतिभागियों की तकनीकी बोली पास हुई थी।
अंत में अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए एक महीने के भीतर संबंधित सचिव के समक्ष विस्तृत प्रत्यावेदन देने की अनुमति प्रदान की है। साथ ही संकेत दिया कि मामले में निष्पक्षता और प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।