देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी—में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने भारतीय राजनीति की दिशा में बड़ा बदलाव संकेतित किया है। इन चुनावों में मतदाताओं ने विकास, स्थिरता और बेहतर शासन के मुद्दों पर स्पष्ट जनादेश दिया है।
पश्चिम बंगाल:
294 सीटों वाले राज्य में बहुमत का आंकड़ा 148 है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) 80 सीटों पर सिमट गई। यह परिणाम राज्य में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक समीकरणों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
तमिलनाडु:
234 सीटों वाले इस राज्य में बहुमत 118 का है। नई पार्टी TVK ने 107 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरने में सफलता पाई। DMK गठबंधन को 74 और AIADMK गठबंधन को 53 सीटें मिलीं। यह चुनाव राज्य में नए नेतृत्व के उदय का संकेत देता है।
केरल:
140 सीटों में बहुमत 71 का है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 97 सीटों के साथ जोरदार वापसी की, जबकि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) 35 सीटों पर सिमट गया। राज्य में सत्ता परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा गया।
असम:
126 सीटों वाले राज्य में NDA ने लगभग 92 सीटें जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी। कांग्रेस गठबंधन को करीब 21 सीटें मिलीं, जबकि अन्य दल पीछे रहे। यह परिणाम निरंतर शासन के पक्ष में जनसमर्थन को दर्शाता है।
पुडुचेरी:
30 सीटों वाले केंद्र शासित प्रदेश में NDA (AINRC+BJP) ने 18 सीटें जीतकर सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन को 6 सीटें मिलीं। यह क्षेत्र भी स्थिर नेतृत्व के पक्ष में जाता दिखा।
इन चुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता अब पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर प्रदर्शन और विकास के आधार पर निर्णय ले रहे हैं। आने वाले राष्ट्रीय चुनावों पर भी इन परिणामों का प्रभाव पड़ने की संभावना है।