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धार भोजशाला को हाई कोर्ट ने माना वाग्देवी मंदिर, 2003 का आदेश रद्द

इंदौर: इंदौर हाई कोर्ट ने धार भोजशाला विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को वाग्देवी मंदिर माना है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि हिंदुओं की पूजा-अर्चना यहां लगातार होती रही है और कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने एएसआई सर्वे पर संतोष जताते हुए कहा […]

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  • May 15, 2026 5:28 pm IST, Published 2 hours ago

इंदौर: इंदौर हाई कोर्ट ने धार भोजशाला विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को वाग्देवी मंदिर माना है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि हिंदुओं की पूजा-अर्चना यहां लगातार होती रही है और कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने एएसआई सर्वे पर संतोष जताते हुए कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि यह स्थल राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का विवादित परिसर 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक है और इसका धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती मंदिर सहित भोजशाला का है। हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर प्रतिबंध लगाते हुए मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

अदालत ने कहा कि भारत सरकार और एएसआई को भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण केंद्र से जुड़े संरक्षण और प्रबंधन पर निर्णय लेने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 1958 के अधिनियम के तहत परिसर के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी एएसआई के पास रहेगी।

फैसले के बाद हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने भोजशाला परिसर को राजा भोज और वाग्देवी से संबंधित माना है। साथ ही लंदन म्यूजियम में रखी वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग पर भी कोर्ट ने सरकार को विचार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मुस्लिम पक्ष से कहा है कि वे सरकार को प्रत्यावेदन दें, ताकि उन्हें वैकल्पिक भूमि देने पर विचार किया जा सके।

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