होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के तेल और व्यापार के सबसे संवेदनशील जलमार्गों में गिना जाता है, अब ईरान की नई योजना के तहत कड़क नियंत्रण में आ गया है।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख ने घोषणा की कि इस रणनीति के तहत केवल ईरान के साथ सहयोग करने वाले व्यापारी जहाजों को ही इस अहम मार्ग का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।
यह कदम ईरान की रणनीतिक पकड़ को मजबूत करेगा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर एक नया समीकरण खड़ा कर देगा।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस नए ट्रैफिक मैकेनिज्म के तहत विशेष सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाएगा और “फ्रीडम प्रोजेक्ट” जैसे विदेशी ऑपरेटरों के लिए यह रूट पूरी तरह बंद रहेगा।
अब सवाल यह है कि क्या दुनिया की समुद्री व्यापार नीतियों पर इस नए ‘सिक्योर रूट’ का असर क्या होगा, और कौन-कौन से देश ईरान के सहयोगी बनेंगे?