चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया इतिहास रच गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की अगुआई वाली ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार गुरुवार सुबह संपन्न हो गया। चेन्नई के लोक भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 23 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी सुर्खी रही कांग्रेस की सरकार में एंट्री। तमिलनाडु की सियासत में पूरे 59 साल के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस किसी सरकार का हिस्सा बनी है।
21 + 2 का फॉर्मूला: आज शपथ लेने वाले 23 मंत्रियों में से 21 विधायक मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK से हैं, जबकि 2 मंत्री कांग्रेस कोटे से बनाए गए हैं।
कांग्रेस के ये दो विधायक बने मंत्री: किल्लियूर सीट से सीनियर कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार और मेलूर सीट से विधायक पी. विश्वनाथन ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है।
द्रविड़ राजनीति में बड़ा बदलाव: 1967 में के. कामराज और एम. भक्तवत्सलम के दौर के बाद यह पहली बार है जब कांग्रेस तमिलनाडु में सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी है। इससे पहले डीएमके या एआईएडीएमके ने कभी भी सहयोगियों को सरकार में शामिल नहीं किया था।
बाकियों को भी न्योता: टीवीके के वरिष्ठ नेता और पीडब्ल्यूडी मंत्री आधव अर्जुना ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री विजय की इच्छा के मुताबिक सहयोगी दल VCK (विदुथलाई चिरुथइगल काची) और IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) को भी सरकार में शामिल होने का खुला न्योता दिया गया है।
बागी नेताओं को झटका: AIADMK से आए बागी गुट के नेताओं को फिलहाल इस कैबिनेट विस्तार में कोई जगह नहीं मिली है।
याद दिला दें कि हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ 85.1% वोटिंग हुई थी, जिसके बाद सूबे की सियासत पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस पहले एम.के. स्टालिन की DMK के साथ गठबंधन में थी, लेकिन स्टालिन ने चुनाव से पहले साफ कह दिया था कि तमिलनाडु में ‘पावर शेयरिंग’ (सत्ता में हिस्सेदारी) का फॉर्मूला लागू नहीं होगा।
नतीजे आने के बाद जब विजय की TVK बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंची, तो 4 मई को कांग्रेस (जिसके पास 5 विधायक हैं) ने DMK गठबंधन छोड़कर विजय सरकार को समर्थन देने का ऐतिहासिक फैसला किया।
पॉलिटिकल कॉरिडोर की चर्चा: इस कैबिनेट विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने न सिर्फ अपनी सरकार को मजबूती दी है, बल्कि कांग्रेस, VCK और वामपंथियों को साथ जोड़कर राज्य में एक नए वैचारिक और राजनीतिक समीकरण की नींव रख दी है।