बंगाल की फालता सीट पर री-पोलिंग खत्म

87.76% बंपर वोटिंग, TMC उम्मीदवार लापता, घर-दफ्तर पर लटका ताला कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फालता विधानसभा सीट पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच पुनर्मतदान (Re-polling) का काम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चले इस मतदान में जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव […]

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  • May 21, 2026 8:11 pm IST, Published 1 hour ago

87.76% बंपर वोटिंग, TMC उम्मीदवार लापता, घर-दफ्तर पर लटका ताला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फालता विधानसभा सीट पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच पुनर्मतदान (Re-polling) का काम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चले इस मतदान में जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव आयोग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, शाम 7 बजे तक फालता के सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर कुल 87.76 प्रतिशत का रिकॉर्डतोड़ मतदान दर्ज किया गया है।

इस चुनाव के नतीजे आने वाले 24 मई को घोषित किए जाएंगे। लेकिन, वोटिंग के इस महामुकाबले के बीच फालता की जमीनी सियासत में एक बेहद हैरान करने वाला ड्रामा देखने को मिला।

वोटिंग के दिन TMC उम्मीदवार गायब, घर-दफ्तर पर लगा ताला

फालता सीट पर मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है। लेकिन वोटिंग के दिन टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान पूरे परिदृश्य से पूरी तरह गायब रहे।

  • रहस्यमयी गायब होना: चुनाव से ठीक पहले जहांगीर खान ने मौखिक रूप से अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का एलान कर दिया था। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग को यह बात लिखित में नहीं दी थी, जिसके चलते इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में उनका नाम और टीएमसी का सिंबल मौजूद रहा।

  • लटके मिले ताले: आज मतदान के दिन जहांगीर खान का कोई सुराग नहीं मिला। फालता स्थित उनके निजी आवास और टीएमसी के स्थानीय पार्टी कार्यालय, दोनों ही जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा और ताले लटके मिले।

आखिर फालता में दोबारा पोलिंग क्यों करानी पड़ी?

फालता विधानसभा क्षेत्र में इससे पहले 29 अप्रैल को आम चुनाव के तहत मतदान हुआ था। लेकिन उस दिन हुए घटनाक्रम ने चुनाव की शुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद चुनाव आयोग को री-पोलिंग का कड़ा फैसला लेना पड़ा:

  • BJP के सिंबल पर टेप: 29 अप्रैल को वोटिंग के दौरान कई बूथों से गंभीर शिकायतें आई थीं कि ईवीएम मशीनों पर बीजेपी के चुनावी सिंबल (कमल के फूल) पर जानबूझकर टेप चिपका दिया गया था, ताकि लोग उसपर वोट न डाल सकें।

  • 60 बूथों पर छेड़छाड़ के सबूत: तत्कालीन चुनाव पर्यवेक्षक (Observer) सुब्रत गुप्ता ने खुद पूरे क्षेत्र का दौरा किया था। जांच-पड़ताल में सामने आया कि कम से कम 60 मतदान केंद्रों (Booths) पर ईवीएम के साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई थी।

  • वेब कैमरों से छेड़छाड़: जांच में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि चुनावी पारदर्शिता के लिए मतदान केंद्रों पर जो लाइव वेब कैमरे लगाए गए थे, उनके फुटेज और एंगल के साथ भी छेड़छाड़ करने की कोशिशें की गई थीं।

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