मेदिनीनगर (पलामू): रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने पूर्व मध्य रेलवे के 800 स्टेशनों सहित देशभर के 7,500 रेलवे स्टेशनों का फायर सेफ्टी ऑडिट (अग्नि सुरक्षा जांच) कराने का निर्णय लिया है। इस बड़े सुरक्षा अभियान में झारखंड का प्रमुख डालटनगंज रेलवे स्टेशन भी शामिल है।
रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों (GMs) को पत्र जारी कर दिया है। इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य स्टेशनों पर मौजूद अग्नि सुरक्षा इंतजामों की बारीकी से जांच करना है, ताकि किसी भी कमी को समय रहते दूर कर यात्रियों और रेलवे संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ और कमर्शियल एक्टिविटीज को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा रहा है। ऑडिट के दौरान सिविल, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल और सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम निम्नलिखित व्यवस्थाओं को जांचेगी:
इलेक्ट्रिकल और वेंटिलेशन: स्टेशन भवनों की संरचना, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, एसी (AC) और वेंटिलेशन सिस्टम की जांच।
फायर फाइटिंग सिस्टम: आग बुझाने वाले आधुनिक उपकरण, स्प्रिंकलर सिस्टम और पानी की उपलब्धता।
इमरजेंसी एग्जिट: आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के रास्ते (Emergency Exits) और पंपिंग व्यवस्था।
नियमों का पालन: यह सुनिश्चित करना कि स्टेशन परिसर में फायर सेफ्टी के सभी तय नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है या नहीं।
सटीक जांच के लिए विशेष रणनीति: इस ऑडिट को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए रेलवे ने बहु-विभागीय टीमों का गठन किया है। इस संयुक्त टीम में रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा विशेषज्ञ एजेंसियों और राज्य अग्निशमन विभाग (State Fire Department) की भी मदद ली जाएगी, ताकि किसी भी तकनीकी खामी को बारीकी से पकड़ा जा सके।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, केवल उपकरणों की जांच ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति से निपटने के लिए मानव संसाधन को भी तैयार किया जा रहा है:
स्टेशनों पर लगातार आधुनिक सुरक्षा उपकरण इंस्टॉल किए जा रहे हैं।
रेलवे कर्मचारियों को आगजनी जैसी घटनाओं से निपटने के लिए विशेष फायर सेफ्टी प्रशिक्षण (Training) दिया जा रहा है।
समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है ताकि आपातकाल में सभी मुस्तैद रहें।
रेलवे का मानना है कि इस ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर एक नई और बेहद प्रभावी ‘फायर सेफ्टी पॉलिसी’ तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में देश के सभी रेलवे स्टेशनों को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।