नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई का समर्थन किया है। एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में टेलीग्राम का उपयोग कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा फर्जी प्रश्नपत्रों और पेपर लीक की अफवाहें फैलाने के लिए किया जा रहा था, जिससे लाखों छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी।
अभिषेक सिंह ने एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि कई टेलीग्राम चैनल और समूह आगामी नीट परीक्षा के “असली प्रश्नपत्र” होने का दावा कर रहे थे। इन दावों के जरिए छात्रों को ठगने की कोशिश की जा रही थी। कुछ गिरोह छात्रों की चिंता और परीक्षा के दबाव का फायदा उठाकर उनसे हजारों रुपये वसूल रहे थे। जांच में सामने आया कि अधिकांश प्रश्नपत्र पूरी तरह फर्जी थे और उनका वास्तविक परीक्षा से कोई संबंध नहीं था।
एनटीए के अनुसार, एजेंसी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए टेलीग्राम अधिकारियों से संपर्क किया और संदिग्ध चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद 200 से अधिक ऐसे चैनल और समूहों को ब्लॉक किया गया, जो पेपर लीक के नाम पर भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो बड़ी संख्या में छात्र धोखाधड़ी का शिकार हो सकते थे।
जानकारी के अनुसार, 3 मई को आयोजित परीक्षा से पहले भी कई चैनलों पर कथित तौर पर “नीट का असली पेपर” उपलब्ध होने के दावे किए गए थे। हालांकि बाद में जांच में ये दावे झूठे पाए गए। एनटीए का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली ऐसी अफवाहें न केवल छात्रों को गुमराह करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
महानिदेशक अभिषेक सिंह ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह या सोशल मीडिया पोस्ट पर आंख बंद कर भरोसा न करें। परीक्षा से जुड़ी हर जानकारी केवल एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत नोटिफिकेशन के माध्यम से ही प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि फर्जी पेपर लीक, साइबर धोखाधड़ी और परीक्षा संबंधी अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए साइबर एजेंसियों और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच परीक्षा संबंधी अपराधों के नए तरीके सामने आ रहे हैं। ऐसे में छात्रों को जागरूक रहने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की आवश्यकता है। टेलीग्राम पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य परीक्षा की शुचिता बनाए रखना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है।